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'सरकारी शिक्षा से उठ रहा है जनता का भरोसा': 8.4 लाख छात्रों के स्कूल छोड़ने पर अशोक गहलोत का तीखा हमला
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 12:31 am

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकारी स्कूलों में नामांकन में 8.4 लाख की कमी पर चिंता जताई है और वर्तमान सरकार की नीतियों की आलोचना की है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने हाल ही में सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में भारी गिरावट आई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में लगभग 8.4 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता का सरकारी शिक्षा प्रणाली से भरोसा उठ रहा है।
गहलोत ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई महत्वपूर्ण योजनाओं, जैसे कि महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल, को वर्तमान सरकार द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। गहलोत के अनुसार, इन स्कूलों का उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा प्रदान करना था, लेकिन अब इन संस्थानों में संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता देखी जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या का इस तरह गिरना राज्य के भविष्य के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह अंतर और बढ़ सकता है। गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने के चक्कर में सार्वजनिक शिक्षा तंत्र को कमजोर कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे राज्यों में शिक्षा का स्तर सीधे तौर पर वहां से होने वाले प्रवास और रोजगार को प्रभावित करता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह मुद्दा प्रासंगिक है, क्योंकि वहां रह रहे कई प्रवासी राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं और अपने गृह राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में गहरी रुचि रखते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए भारत में शिक्षा की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय रही है, क्योंकि यह उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के विकास को प्रभावित करती है।
दूसरी ओर, वर्तमान राज्य सरकार ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं और नामांकन के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि वे केवल संख्या बढ़ाने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, गहलोत द्वारा उठाए गए सवाल और 8.4 लाख की यह संख्या राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गई है।
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