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पुर्तगाल गोल्डन वीजा की मांग में गिरावट: नागरिकता के लिए प्रतीक्षा अवधि दोगुनी होने से निवेशक पीछे हटे
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 06:31 pm
पुर्तगाल द्वारा नागरिकता के लिए प्रतीक्षा अवधि को 5 से बढ़ाकर 10 वर्ष करने के बाद निवेशकों का रुझान कम हुआ है। भारतीय मूल के निवेशकों के लिए अब अन्य विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं।
पुर्तगाल के प्रसिद्ध 'गोल्डन वीजा' कार्यक्रम के प्रति विदेशी निवेशकों के उत्साह में भारी कमी देखी जा रही है। हाल ही में पुर्तगाली सरकार द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करने के निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। इस नीतिगत बदलाव के कारण न केवल नए आवेदनों में कमी आई है, बल्कि कई मौजूदा निवेशकों ने भी अपनी पूंजी वापस निकालने और प्रक्रिया से हटने का मन बना लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव ने पुर्तगाल की छवि एक निवेश-अनुकूल देश के रूप में प्रभावित की है। दशकों से यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है जो यूरोपीय संघ (EU) की नागरिकता के साथ-साथ पुर्तगाल में रहने और व्यापार करने की सुविधा चाहते थे। हालांकि, समय सीमा को दोगुना करने के फैसले ने उन भारतीय परिवारों और निवेशकों की योजनाओं पर पानी फेर दिया है जो जल्द से जल्द यूरोपीय पासपोर्ट प्राप्त करना चाहते थे।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक जो यूरोप में अपने व्यापार का विस्तार करना चाहते थे या अपने परिवार के लिए 'प्लान-बी' के रूप में पुर्तगाल को देख रहे थे, अब स्पेन या ग्रीस जैसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसने के बाद, कई भारतीय निवेशक अपनी संपत्ति का विविधीकरण (Diversification) करने के लिए यूरोपीय अचल संपत्ति में निवेश करते हैं, लेकिन 10 साल की लंबी अवधि अब एक बड़ी बाधा बन गई है।
आंकड़ों के अनुसार, इस घोषणा के बाद से निवेश की गति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, पुर्तगाल सरकार का तर्क है कि यह कदम देश की आवास नीति में सुधार और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पुर्तगाल अभी भी रहने के लिए एक बेहतरीन स्थान है और जो निवेशक वास्तव में यहां बसना चाहते हैं, उनके लिए यह कार्यक्रम अभी भी प्रासंगिक है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अब 'रेसिडेंस बाय इन्वेस्टमेंट' के बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। पुर्तगाल के इस फैसले से उन देशों को फायदा हो सकता है जिनकी नागरिकता प्रक्रिया सरल और तेज है। भारतीय निवेशकों के लिए, जो अक्सर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के आधार पर निवेश का निर्णय लेते हैं, अब पुर्तगाल की तुलना में अन्य यूरोपीय देशों की शर्तें अधिक व्यावहारिक नजर आ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या पुर्तगाल निवेशकों को वापस आकर्षित करने के लिए किसी नई रियायत की घोषणा करता है या नहीं।
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