ऑस्ट्रेलिया
पिलबारा में 40 साल बाद बड़ी हड़ताल की आहट: BHP के रुख से नाराज माइनिंग कर्मचारियों ने लिया बड़ा फैसला
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 02:31 pm
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में BHP के कर्मचारी 40 वर्षों में पहली बार हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे खनन क्षेत्र में हलचल मच गई है।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का पिलबारा क्षेत्र, जो वैश्विक लौह अयस्क (iron ore) आपूर्ति का केंद्र माना जाता है, एक ऐतिहासिक औद्योगिक गतिरोध का गवाह बनने जा रहा है। दिग्गज माइनिंग कंपनी BHP के सैकड़ों कर्मचारियों ने वेतन और काम की शर्तों को लेकर चल रही बातचीत विफल होने के बाद हड़ताल पर जाने के पक्ष में मतदान किया है। यह पिछले 40 वर्षों में इस क्षेत्र में होने वाली अपनी तरह की पहली बड़ी औद्योगिक कार्रवाई होगी।
वेस्टर्न माइन वर्कर्स अलायंस (WMWA) के नेतृत्व में, कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि BHP प्रबंधन बातचीत के दौरान 'अमेरिकी शैली' की हठधर्मी (stonewalling) वाली रणनीति अपना रहा है। यूनियन का कहना है कि कंपनी जानबूझकर चर्चाओं में देरी कर रही है और कर्मचारियों की उचित मांगों को अनसुना किया जा रहा है। इस विवाद का मुख्य कारण वेतन वृद्धि, बेहतर कार्य अनुसूची (rosters) और नौकरी की सुरक्षा बताया जा रहा है।
पिलबारा में काम करने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पिछले एक दशक में, ऑस्ट्रेलिया के माइनिंग सेक्टर में भारतीय मूल के इंजीनियरों, भूवैज्ञानिकों (geologists) और तकनीकी विशेषज्ञों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (WA) में बसने वाले कई भारतीय परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन खदानों से जुड़े हुए हैं। यदि यह हड़ताल लंबी खींचती है, तो इसका असर न केवल उत्पादन पर पड़ेगा, बल्कि इस क्षेत्र में काम करने वाले सैकड़ों प्रवासियों की आर्थिक स्थिति और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।
BHP ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि वे ईमानदारी से बातचीत कर रहे हैं और एक ऐसे समझौते पर पहुंचना चाहते हैं जो कर्मचारियों के लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ कंपनी की उत्पादकता को भी बनाए रखे। हालांकि, यूनियन का दावा है कि कंपनी ने उनकी प्राथमिकताओं को दरकिनार कर दिया है, जिससे उनके पास हड़ताल का रास्ता चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हड़ताल का व्यापक आर्थिक प्रभाव हो सकता है। लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, और पिलबारा की खदानों में कामकाज रुकने से वैश्विक बाजार में इसकी कीमतों में उछाल आ सकता है। इसके अलावा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया सरकार के बजट में भी रॉयल्टी के माध्यम से मिलने वाले राजस्व में कमी आ सकती है।
फिलहाल, आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कुछ और कोशिशें हो सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों के कड़े रुख को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि पिलबारा की खदानें जल्द ही शांत हो सकती हैं, जो दशकों से 24/7 चलती आ रही हैं। भारतीय समुदाय के पेशेवर भी इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यह औद्योगिक विवाद आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया के रिसोर्स सेक्टर में काम के माहौल और वेतन मानकों को तय कर सकता है।
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