राजनीति
ऑपरेशन ब्लू स्टार: धार्मिक सुधार से सैन्य कार्रवाई तक, क्यों मजबूर हुई थीं इंदिरा गांधी?
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 12:30 pm

जरनैल सिंह भिंडरावाले के बढ़ते प्रभाव और स्वर्ण मंदिर में हथियारों के जमावड़े ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सैन्य विकल्प चुनने पर मजबूर कर दिया था।
भारत के आधुनिक इतिहास में जून 1984 का हफ्ता एक अमिट और संवेदनशील अध्याय के रूप में दर्ज है। 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि उन परिस्थितियों का परिणाम था जिन्होंने देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने इस कार्रवाई को अंजाम देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था, लेकिन इस स्थिति तक पहुँचने की कहानी काफी जटिल है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में जरनैल सिंह भिंडरावाले का उभार था। शुरुआत में भिंडरावाले को एक कट्टर धार्मिक नेता के रूप में देखा गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सिख युवाओं को नशे, शराब और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर कर धर्म के करीब लाना था। उनके इस अभियान को समाज में काफी सराहना मिली और उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। हालांकि, समय के साथ यह धार्मिक प्रभाव राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और अलगाववादी विचारधारा में बदलने लगा।
1980 के दशक की शुरुआत तक पंजाब में उग्रवाद का दौर शुरू हो चुका था। भिंडरावाले और उनके समर्थकों ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) परिसर को अपना मुख्यालय बना लिया। देखते ही देखते, पवित्र मंदिर परिसर के भीतर भारी मात्रा में आधुनिक हथियार जमा किए जाने लगे। कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही थी और राज्य प्रशासन उग्रवादियों के सामने लाचार नजर आने लगा था। मंदिर की पवित्रता और देश की संप्रभुता के बीच एक गहरा संकट खड़ा हो गया था।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि उस दौर की घटनाओं ने न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर सिख प्रवासियों के बीच गहरी संवेदनाएं और चर्चाएं पैदा की थीं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे पुराने प्रवासी आज भी उस दौर की अनिश्चितता और उसके बाद के सामाजिक प्रभावों को याद करते हैं।
इंदिरा गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती थी। सरकार ने कई बार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन भिंडरावाले की बढ़ती मांगों और हिंसक गतिविधियों ने सुलह के रास्तों को बंद कर दिया। अंततः, जब यह स्पष्ट हो गया कि स्वर्ण मंदिर को उग्रवादियों के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए बल प्रयोग अनिवार्य है, तब 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' का आदेश दिया गया।
3 जून 1984 को सेना ने अमृतसर को चारों तरफ से घेर लिया और 5 जून की रात को मुख्य ऑपरेशन शुरू हुआ। इस कार्रवाई में भारी जनहानि हुई और अकाल तख्त को भी नुकसान पहुँचा। इस घटना ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी, जिसका दुखद परिणाम कुछ महीनों बाद इंदिरा गांधी की हत्या के रूप में सामने आया। आज भी यह विषय भारतीय लोकतंत्र और सुरक्षा नीति के संदर्भ में गहन विश्लेषण का केंद्र बना हुआ है।
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