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५ से १२ साल के बच्चों के लिए जरूरी है संतुलित आहार: शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अपनाएं ये डाइट टिप्स
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 02:31 pm

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर युक्त आहार अनिवार्य है। जानें कैसे सही पोषण उनकी बौद्धिक क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बना सकता है।
५ से १२ वर्ष की आयु बच्चों के जीवन का वह पड़ाव है जहाँ उनके शरीर और मस्तिष्क दोनों का तेजी से विकास होता है। इस दौरान बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताएं वयस्कों से भिन्न होती हैं, क्योंकि उन्हें न केवल दैनिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, बल्कि विकासशील हड्डियों और मांसपेशियों के निर्माण के लिए अतिरिक्त पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र में दी गई सही डाइट भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की नींव को कमजोर कर सकती है और बच्चों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ा सकती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के परिवारों के लिए खान-पान में तालमेल बिठाना अक्सर एक चुनौती होती है। ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में टिफिन संस्कृति और घर पर पारंपरिक भारतीय भोजन के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। बच्चों के आहार में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फलों और सब्जियों की होती है। इनमें मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत बनाते हैं। फल और सब्जियां न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती हैं, बल्कि इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाते हैं, जिससे वे मौसमी बीमारियों और संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं।
दिमागी विकास के लिए ओमेगा-३ फैटी एसिड और आयरन युक्त खाद्य पदार्थ अत्यंत आवश्यक हैं। अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और हरी पत्तेदार सब्जियां मस्तिष्क की नसों को सक्रिय रखती हैं, जिससे बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त में सुधार होता है। इसके साथ ही, प्रोटीन को 'बिल्डिंग ब्लॉक' माना जाता है। शाकाहारी परिवारों के लिए दालें, पनीर, सोयाबीन और दही प्रोटीन के उत्कृष्ट स्रोत हैं, जबकि मांसाहारी विकल्पों में अंडे और मछली शामिल किए जा सकते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बच्चों के 'लंचबॉक्स' में विविधता होनी चाहिए। माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे ड्रिंक्स के बजाय ताजे फल, नट्स और साबुत अनाज (जैसे पोहा, ओट्स या मल्टीग्रेन सैंडविच) को प्राथमिकता दें। चीनी और अतिरिक्त नमक का अधिक सेवन बच्चों में मोटापे और व्यवहार संबंधी समस्याओं जैसे चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकता है।
एक महत्वपूर्ण पहलू जल-योजन (हाइड्रेशन) का भी है। अक्सर बच्चे खेल-कूद में पानी पीना भूल जाते हैं। शरीर के समुचित संचालन और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। अंततः, भोजन के समय को खुशनुमा बनाना और बच्चों को भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करना उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है।
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