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न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल का कड़ा रुख: टॉम होमन की 'इमिग्रेशन रेड' की धमकी को किया खारिज
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 04:01 am
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने डोनाल्ड ट्रंप के 'बॉर्डर ज़ार' टॉम होमन की धमकी का कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि न्यूयॉर्क में प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बॉर्डर ज़ार' टॉम होमन द्वारा दी गई सामूहिक निर्वासन (mass deportation) की धमकी का पुरजोर विरोध किया है। होमन ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि न्यूयॉर्क जैसे 'सैंक्चुअरी सिटी' (शरण देने वाले शहर) संघीय इमिग्रेशन अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं करते हैं, तो वे शहर में बड़ी संख्या में आईसीई (ICE) एजेंटों को तैनात करेंगे। इसके जवाब में होचुल ने स्पष्ट किया कि न्यूयॉर्क में इस तरह की दमनकारी कार्रवाई के लिए कोई जगह नहीं है।
गवर्नर होचुल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, "न यहाँ, न न्यूयॉर्क में, और कभी नहीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य के कानून और संसाधन नागरिकों की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए हैं, न कि समुदायों को डराने के लिए। उन्होंने इसे संघीय सत्ता का दुरुपयोग बताया और कहा कि न्यूयॉर्क अपनी कानूनी सीमाओं और प्रवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब टॉम होमन ने संकेत दिया कि यदि स्थानीय पुलिस संघीय प्रशासन के साथ मिलकर काम नहीं करती है, तो वे सीधे हस्तक्षेप करेंगे। होमन का तर्क है कि अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और न्यूयॉर्क प्रशासन का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से उन लोगों के मन में भी भय पैदा होगा जो वैध दस्तावेजों के साथ वहां रह रहे हैं या नागरिकता की प्रक्रिया में हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और वैश्विक प्रवासी भारतीयों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। जिस तरह अमेरिका में इमिग्रेशन कानूनों को लेकर सख्ती बरती जा रही है, उसका सीधा असर वहां रह रहे लाखों भारतीयों पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में भी हाल के वर्षों में वीजा नियमों और विदेशी कार्यबल के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक शहरों में होने वाली ये राजनीतिक हलचलें यह दर्शाती हैं कि भविष्य में पश्चिमी देशों में प्रवास करना और वहां बसना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल एक राज्य और केंद्र के बीच की कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह प्रवासियों के प्रति बदलते वैश्विक दृष्टिकोण का प्रतीक है। यदि ट्रंप प्रशासन अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो न्यूयॉर्क को संघीय फंडिंग में कटौती या कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है। होचुल ने संकेत दिया है कि वे अपनी नीतियों से पीछे नहीं हटेंगी, जो यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में अमेरिका में इमिग्रेशन के मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी गतिरोध और गहरा सकता है।
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