राजनीति
‘किसी भी प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा’: सरकार के साथ देर रात हुई बैठक के बाद CJP का बड़ा बयान
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 03:36 pm

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई रोकने और मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया है।
नई दिल्ली और सिडनी के बीच कूटनीतिक और सामाजिक संवाद के बीच, भारत की राजनीतिक हलचलों ने एक बार फिर प्रवासी भारतीयों का ध्यान खींचा है। हालिया घटनाक्रम में, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की है कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण देर रात की बैठक के बाद, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन प्राप्त हुए हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में 'किसी भी प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा' और उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रियाओं को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
CJP के अनुसार, केंद्र सरकार ने पार्टी को विश्वास दिलाया है कि प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए और अधिक राज्य जल्द ही आधिकारिक अधिसूचनाएं जारी करेंगे। इस दिशा में शुरुआती कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। पार्टी ने पुष्टि की है कि बिहार और असम की राज्य सरकारों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम उन हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है जो पिछले आंदोलनों के दौरान कानूनी जटिलताओं में फंस गए थे।
बैठक के विवरण साझा करते हुए CJP के प्रवक्ताओं ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित अन्य राज्यों में भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय लागू करने का वादा किया गया है। सरकार का यह लचीला रुख हाल के हफ्तों में बढ़ते तनाव को कम करने की एक कोशिश माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के मन में कानूनी प्रतिशोध का जो भय था, वह अब इन आश्वासनों के बाद कुछ हद तक कम होता दिख रहा है, जिससे संभावित भविष्य के विरोध प्रदर्शनों की तात्कालिक आवश्यकता भी फिलहाल टल गई है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय मूल रूप से बिहार और असम जैसे राज्यों से आते हैं। भारत में चल रहे आंदोलनों और उनमें शामिल उनके परिजनों पर होने वाली कानूनी कार्रवाई अक्सर यहां के समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी रहती है। ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय कई भारतीय सामाजिक संगठनों ने इस विकास का स्वागत किया है, इसे लोकतांत्रिक संवाद की जीत बताया है। उनका मानना है कि सरकार द्वारा मुकदमों की वापसी से विदेशों में भारत की लोकतांत्रिक छवि मजबूत होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP और सरकार के बीच यह समझौता केवल एक तात्कालिक राहत नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनावों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की एक रणनीति भी हो सकती है। हालांकि, प्रदर्शनकारी समूहों ने सावधानी बरतते हुए कहा है कि वे केवल आश्वासनों पर निर्भर नहीं रहेंगे और अधिसूचनाओं के जमीनी स्तर पर लागू होने का इंतजार करेंगे। फिलहाल, CJP ने अपने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने और सरकार को वादा निभाने का समय देने की अपील की है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्य इस नीति को कितनी तत्परता से अपनाते हैं।
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