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एनएमसी का नए मेडिकल कॉलेजों पर सख्त रुख: अब अधूरे बुनियादी ढांचे के साथ नहीं मिलेगी मंजूरी, मसौदा नियमों पर मांगी गई राय
ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 09:31 pm

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें अब आवेदन के समय पूर्ण बुनियादी ढांचा होना अनिवार्य होगा।
भारत में चिकित्सा शिक्षा के नियामक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और एमबीबीएस सीटों में वृद्धि को लेकर नियमों को और सख्त करने का प्रस्ताव दिया है। आयोग द्वारा जारी हालिया मसौदा संशोधनों के अनुसार, अब उन संस्थानों को अनुमति नहीं दी जाएगी जिनका बुनियादी ढांचा अभी 'निर्माणाधीन' या 'प्रगति पर' है। यह कदम देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और छात्र हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
'नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग (संशोधन) विनियम, 2024' शीर्षक वाले इस मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नए कॉलेज के आवेदन को केवल तभी स्वीकार किया जाएगा जब उसका भौतिक बुनियादी ढांचा और आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह से तैयार हों। इससे पहले, कई संस्थान निर्माण कार्य पूरा होने के वादे पर प्रारंभिक अनुमति प्राप्त कर लेते थे, जिससे बाद में छात्रों को सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता था।
प्रस्तावित नियमों के तहत, आवेदकों को अब अनिवार्य रूप से 'अनिवार्यता प्रमाण पत्र' (Essentiality Certificate) और भूमि स्वामित्व या पट्टे के स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक कॉर्पस फंड और बैंक गारंटी की व्यवस्था को भी कड़ा किया गया है। एनएमसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही संस्थान बाजार में आएं जो वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में सक्षम हों।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत डॉक्टरों का एक बड़ा हिस्सा भारतीय चिकित्सा संस्थानों से स्नातक है। भारत में शिक्षा के मानकों में सख्ती का सीधा अर्थ है कि भविष्य में ऑस्ट्रेलिया आने वाले भारतीय डॉक्टर अंतरराष्ट्रीय मानकों पर और अधिक खरे उतरेंगे। इसके अलावा, कई प्रवासी भारतीय (NRI) परिवार अपने बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए भारत भेजते हैं; उनके लिए ये नए नियम एक सुरक्षा चक्र की तरह काम करेंगे, जिससे उन्हें पता होगा कि वे जिस कॉलेज में निवेश कर रहे हैं, वह सभी बुनियादी सुविधाओं से लैस है।
एनएमसी ने इन प्रस्तावित संशोधनों पर जनता और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार भारत की चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर और अधिक विश्वसनीय बनाएगा, जिससे 'ईएमसी' (AMC) जैसी विदेशी चिकित्सा परिषदों में भारतीय डिग्री की साख और मजबूत होगी।
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