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H-1B वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी: क्या अमेरिका में भारतीयों के लिए बंद हो जाएगा ग्रीन कार्ड का रास्ता?

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 03:31 am
H-1B वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी: क्या अमेरिका में भारतीयों के लिए बंद हो जाएगा ग्रीन कार्ड का रास्ता?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश एक नए विधेयक में H-1B वीजा कार्यक्रम में व्यापक बदलाव और ग्रीन कार्ड की राह को कठिन बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

वाशिंगटन में एक रिपब्लिकन सांसद द्वारा पेश किए गए नए विधायी प्रस्ताव ने अमेरिका में कार्यरत लाखों भारतीय पेशेवरों के बीच चिंता पैदा कर दी है। इस विधेयक का उद्देश्य H-1B वीजा कार्यक्रम में आमूल-चूल परिवर्तन करना है, जिसमें सबसे विवादित बिंदु इस वीजा के माध्यम से मिलने वाले ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) के रास्ते को समाप्त करना है। यदि यह कानून बनता है, तो यह दशकों से चली आ रही उस व्यवस्था को बदल देगा जिसने भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को अमेरिका में बसने का अवसर दिया है। प्रस्तावित विधेयक के तहत H-1B वीजा को केवल एक अस्थायी कार्य परमिट के रूप में देखा जाएगा, न कि नागरिकता की ओर एक कदम के रूप में। वर्तमान में, कई भारतीय पेशेवर H-1B वीजा पर अमेरिका जाते हैं और बाद में उनके नियोक्ता उनके लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करते हैं। नए नियमों के अनुसार, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद पेशेवरों को अपने देश वापस लौटना होगा। इसके अलावा, विधेयक में न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाने और उन कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है जो विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता देती हैं। भारत के दृष्टिकोण से यह खबर काफी गंभीर है क्योंकि अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले कुल H-1B वीजा का लगभग 70-75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय नागरिकों के पास जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल अमेरिका में रह रहे भारतीयों का भविष्य अनिश्चित हो जाएगा, बल्कि भविष्य में वहां जाने की योजना बना रहे युवाओं के उत्साह में भी कमी आएगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रतिभाओं का बड़ा योगदान रहा है, और इस तरह के प्रतिबंधात्मक कदम सिलिकॉन वैली की तकनीकी कंपनियों के लिए भी मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इस खबर के गहरे मायने हैं। ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि जब भी अमेरिका अपनी आव्रजन नीतियों को सख्त करता है, तो कुशल भारतीय पेशेवरों का रुझान ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जर्मनी जैसे देशों की ओर बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया की 'पॉइंट-बेस्ड' माइग्रेशन प्रणाली और हाल ही में घोषित 'मोबिलिटी अरेंजमेंट फॉर टैलेंटेड अर्ली-करियर प्रोफेशनल्स' (MATES) योजना भारतीयों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है। यदि अमेरिका के दरवाजे बंद होते हैं, तो ऑस्ट्रेलिया को और अधिक उच्च-कुशल तकनीकी प्रतिभाएं प्राप्त हो सकती हैं। हालांकि, अभी यह विधेयक प्रारंभिक चरण में है और इसे कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों से पारित होना होगा। फिर भी, अमेरिका में बढ़ता संरक्षणवादी रुख यह संकेत देता है कि वैश्विक मोबिलिटी की शर्तें बदल रही हैं। भारतीय पेशेवरों को अब केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपनी करियर योजनाओं में विविधता लाने की आवश्यकता हो सकती है। आने वाले महीनों में इस विधेयक पर होने वाली बहस यह तय करेगी कि 'अमेरिकन ड्रीम' भारतीयों के लिए कितना सुलभ रह जाएगा।
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