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नेतन्याहू ने ठुकराया डोनाल्ड ट्रंप का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव; हमास ने अंतरराष्ट्रीय दबाव की मांग की

ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 10:38 am
नेतन्याहू ने ठुकराया डोनाल्ड ट्रंप का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव; हमास ने अंतरराष्ट्रीय दबाव की मांग की

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में शांति के लिए डोनाल्ड ट्रंप के 15-सूत्रीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे युद्धविराम की कोशिशों को झटका लगा है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 15-सूत्रीय शांति योजना को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के कूटनीतिक प्रयासों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। नेतन्याहू के इस कदम ने न केवल अंतरराष्ट्रीय समुदायों बल्कि स्वयं इजरायल के भीतर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। हमास के वरिष्ठ अधिकारी बासेम नईम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमास अभी भी उस रोडमैप के लिए प्रतिबद्ध है जिस पर पहले सहमति बनी थी। नईम ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों और विशेष रूप से अमेरिका को नेतन्याहू और उनकी सरकार पर दबाव बनाना चाहिए ताकि वे तय किए गए रास्ते का पालन करें। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतन्याहू अपने आंतरिक राजनीतिक हितों और चुनावी समीकरणों के कारण शांति प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। इस शांति योजना के खारिज होने का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया एक बहुसांस्कृतिक समाज है जहाँ भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। मध्य पूर्व में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और मुद्रास्फीति पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की घरेलू अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त, सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में शांति के पक्ष में हो रहे प्रदर्शनों में भारतीय समुदाय के विभिन्न वर्गों की भागीदारी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का प्रस्ताव क्षेत्र में एक नए सुरक्षा ढांचे की वकालत कर रहा था, लेकिन इजरायली नेतृत्व वर्तमान सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले हमास के पूर्ण खात्मे पर अड़ा हुआ है। नेतन्याहू की कैबिनेट के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं, जहाँ दक्षिणपंथी गुट किसी भी प्रकार की रियायत देने के सख्त खिलाफ हैं। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय ने बार-बार संघर्ष विराम और मानवीय सहायता सुनिश्चित करने की अपील की है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो भारत के संतुलित रुख और ऑस्ट्रेलिया की मानवीय नीतियों दोनों के करीब है, इस क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद कर रहा है। ट्रंप की योजना का खारिज होना यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर कूटनीतिक रस्साकशी और बढ़ सकती है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि जो बाइडन प्रशासन और अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियां नेतन्याहू को बातचीत की मेज पर वापस लाने के लिए क्या कदम उठाती हैं।
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