टेक्नोलॉजी
NEET-UG 2026 और टेलीग्राम विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला, डिजिटल निजता और परीक्षा की सुचिता के बीच कानूनी जंग
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 03:43 pm

दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम बनाम भारत संघ मामले में डिजिटल अधिकारों और परीक्षाओं की पारदर्शिता के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
भारत की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा, NEET-UG के भविष्य को लेकर एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 'टेलीग्राम बनाम भारत संघ' मामले में दिए गए फैसले ने डिजिटल अधिकारों, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और राष्ट्रीय परीक्षाओं की अखंडता के बीच एक जटिल बहस छेड़ दी है। यह मामला विशेष रूप से उन हजारों प्रवासी भारतीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके बच्चे भारत में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने की योजना बना रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अपनी गोपनीयता नीतियों (Privacy Policies) की आड़ में अवैध गतिविधियों को संरक्षण नहीं दे सकते। कोर्ट का यह रुख तब सामने आया है जब NEET-UG परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग के लिए टेलीग्राम के व्यापक दुरुपयोग की खबरें आई थीं। केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों का तर्क है कि टेलीग्राम के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग कर अपराधी पकड़े जाने से बच जाते हैं, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता खतरे में पड़ जाती है।
न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता का अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें सार्वजनिक व्यवस्था और परीक्षाओं की पवित्रता की कीमत पर नहीं बनाए रखा जा सकता। यदि किसी प्लेटफॉर्म का उपयोग प्रश्नपत्रों के वितरण या नकल के लिए किया जा रहा है, तो कार्यकारी शक्तियों के पास यह अधिकार है कि वे दोषियों की पहचान करने के लिए डेटा की मांग करें। यह फैसला आईटी नियमों के तहत मध्यस्थ (Intermediary) जवाबदेही के प्रावधानों को और अधिक मजबूत करता है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर दोहरी चिंता का विषय है। कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई छात्र भारत के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के माध्यम से प्रवेश चाहते हैं। परीक्षाओं में इस तरह की सुरक्षा खामियां और कानूनी खींचतान न केवल प्रक्रिया में देरी करती हैं, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली की वैश्विक विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं। मेलबर्न और सिडनी में रहने वाले अभिभावकों ने अक्सर इन अनिश्चितताओं के कारण अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की परीक्षा तक सरकार टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण के लिए और भी कड़े नियम लागू कर सकती है। इसमें 'ओरिजिनेटर' यानी संदेश की शुरुआत करने वाले व्यक्ति की पहचान को अनिवार्य बनाना शामिल हो सकता है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषक इसे डिजिटल सेंसरशिप की ओर एक कदम मान रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायपालिका तकनीकी स्वायत्तता और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच कैसे सामंजस्य बिठाती है ताकि NEET-UG जैसी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
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