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NEET पेपर लीक विवाद: संसदीय समिति ने NTA से मांगी 'पेपर लीक' की परिभाषा, CBSE के OSM टेंडर पर भी उठाए सवाल

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 12:01 am
NEET पेपर लीक विवाद: संसदीय समिति ने NTA से मांगी 'पेपर लीक' की परिभाषा, CBSE के OSM टेंडर पर भी उठाए सवाल

नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने NTA और CBSE से जवाब तलब करते हुए प्रक्रियागत खामियों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

भारत की राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। नीट (NEET) परीक्षा में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन प्रणाली में खामियों की जांच कर रही संसदीय स्थायी समिति ने इन दोनों स्वायत्त निकायों से कड़े सवाल पूछे हैं। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने हाल ही में हुई बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से स्पष्ट रूप से पूछा है कि आधिकारिक तौर पर उनकी दृष्टि में 'पेपर लीक' की सटीक परिभाषा क्या है? यह घटनाक्रम भारतीय प्रवासियों और विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उन हजारों भारतीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके बच्चे डॉक्टर बनने का सपना लेकर भारत में चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। एनआरआई (NRI) कोटे के तहत हर साल बड़ी संख्या में छात्र ऑस्ट्रेलिया से भारत जाकर परीक्षाएं देते हैं, ऐसे में परीक्षाओं की शुचिता पर उठते सवाल वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बने हुए हैं। संसदीय समिति ने NTA से यह भी पूछा कि क्या साल 2018 में अपनी स्थापना के बाद से किसी भी परीक्षा में पेपर लीक की घटना हुई है? समिति के सदस्यों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि यदि एजेंसी के पास पेपर लीक की कोई स्पष्ट परिभाषा या मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) नहीं है, तो वह ऐसी घटनाओं को रोकने में कैसे सक्षम हो सकती है। NTA को अब इन सभी सवालों के लिखित जवाब समिति के समक्ष पेश करने होंगे। दूसरी ओर, CBSE भी समिति के रडार पर है। मामला 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) के लिए दिए गए ठेकों से जुड़ा है। समिति ने बोर्ड से पूछा कि क्या उन्होंने कोएम्प्ट (Coempt) नामक कंपनी को डिजिटल मूल्यांकन का ठेका देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि (background check) की उचित जांच की थी? आरोप हैं कि मूल्यांकन की इस डिजिटल प्रक्रिया में कई विसंगतियां पाई गई थीं, जिससे हजारों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवैधानिक निकायों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी न केवल भारत के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय शिक्षा प्रणाली की साख को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर अपने बच्चों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की उम्मीद करते हैं। संसदीय समिति की यह सख्ती आने वाले समय में NTA और CBSE के ढांचे में बड़े प्रशासनिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
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