राजनीति
मुंबई में बड़ा आवास घोटाला: 1,000 से अधिक बिल्डरों ने गरीबों के हक के 10,000 घर दबाए, म्हाडा कानूनी कार्रवाई की तैयारी में
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 08:00 am

मुंबई में बिल्डरों ने नियमों का उल्लंघन कर कम आय वर्ग के लिए आरक्षित 10,000 घर म्हाडा को नहीं सौंपे हैं, जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ है।
मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में एक बड़े आवास घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें 1,000 से अधिक बिल्डरों पर आरोप है कि उन्होंने निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए आरक्षित लगभग 10,000 घरों को सरकारी एजेंसी म्हाडा (MHADA) को नहीं सौंपा है। महाराष्ट्र सरकार की नीति के अनुसार, 4,000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर विकसित होने वाली आवासीय परियोजनाओं में 20 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
नियमों के मुताबिक, इन आरक्षित घरों को बिल्डरों द्वारा म्हाडा को सौंपना होता है, जिसे बाद में लॉटरी के माध्यम से आम नागरिकों को किफायती दरों पर आवंटित किया जाता है। हालांकि, हालिया जांच में यह सामने आया है कि 1,028 से अधिक विकासकर्ताओं ने इन घरों पर कब्जा जमाए रखा है या नियमों की अनदेखी की है। इस चूक के कारण हजारों गरीब परिवार अपने घर के सपने से वंचित रह गए हैं।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर तत्कालीन फडणवीस सरकार और वर्तमान प्रशासन पर निशाना साधा है। आरोप लगाया जा रहा है कि बिल्डरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए निगरानी में ढील दी गई। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) अब इस मामले में कड़ा रुख अपना रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोषी बिल्डरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और उन्हें 'ब्लैकलिस्ट' करने पर विचार किया जा रहा है।
यह मामला न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि मुंबई जैसे शहर में जहां रियल एस्टेट की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहां गरीबों के हक को मारने की साजिश की ओर इशारा करता है। प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय जो मुंबई में निवेश करते हैं या वहां अपने परिवारों के लिए घर की उम्मीद रखते हैं, इस खबर को पारदर्शिता की कमी के रूप में देख रहे हैं।
म्हाडा के अधिकारियों का कहना है कि वे अब हर प्रोजेक्ट का ऑडिट कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार को उसका उचित हिस्सा मिले। यदि बिल्डर इन घरों को सौंपने में विफल रहते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके भावी प्रोजेक्ट्स पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस घोटाले ने राज्य में किफायती आवास योजनाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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