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भीषण गर्मी और बिजली कटौती से बेहाल मुंबईकर, रातों को समुद्र किनारे सोने को मजबूर
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:07 am

मुंबई में भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग रात गुजारने के लिए समुद्र तटों का रुख कर रहे हैं।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस समय भीषण गर्मी और अत्यधिक उमस की चपेट में है। पारे के लगातार चढ़ने और शहर के कई हिस्सों में लंबे समय तक होने वाली बिजली कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मुंबई के कई इलाकों, विशेष रूप से वर्सोवा और जुहू के निवासी, रात की नींद लेने के लिए अपने घरों को छोड़कर समुद्र तटों का रुख कर रहे हैं।
मुंबई में मानसून से पहले की यह गर्मी इस साल पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ रही है। कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके इस शहर में रात के समय भी तापमान में गिरावट नहीं हो रही है, जिससे घरों के भीतर रहना दूभर हो गया है। वर्सोवा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में, जहां मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के लोग छोटे घरों में रहते हैं, बिजली कटौती ने संकट को और गहरा कर दिया है। बिना पंखे या एयर कंडीशनिंग के बंद कमरों में दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो रही है, जिसके कारण लोग खुले आसमान और समुद्र की ठंडी हवा की तलाश में तटों पर डेरा डाल रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल शौक नहीं बल्कि मजबूरी है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर के भीतर की गर्मी जानलेवा साबित हो रही है। समुद्र किनारे रेत पर चादर बिछाकर सो रहे लोगों की बढ़ती संख्या मुंबई के बुनियादी ढांचे और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बिजली विभाग का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में भारी उछाल आया है, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है और ट्रिपिंग की समस्या हो रही है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह चिंता का विषय बना हुआ है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, जिनके परिवार मुंबई में रहते हैं, अपने परिजनों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों में सक्रिय भारतीय संगठनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुंबई में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को हाइड्रेटेड रहने और गर्मी से बचने के उपाय साझा किए हैं। प्रवासियों का कहना है कि मुंबई जैसे वैश्विक शहर में इस तरह की स्थिति देखना दुखद है, जहां लोगों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सड़कों या तटों पर सोना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई में बढ़ती गर्मी का एक मुख्य कारण 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव है। तेजी से कम होते हरित क्षेत्र और बढ़ते निर्माण कार्य ने शहर की गर्मी सोखने की क्षमता को कम कर दिया है। अब सभी की निगाहें मानसून पर टिकी हैं, जिसके जून के दूसरे सप्ताह तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। तब तक, मुंबईकरों के लिए ठंडी हवा का एकमात्र सहारा अरब सागर की लहरें ही बनी हुई हैं।
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