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MP ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी: एक पेड़ काटने पर 20 पौधे लगाना अनिवार्य, 80% पेड़ों की होगी शिफ्टिंग
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:52 am

मध्य प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का ड्राफ्ट पेश किया है, जिसमें विकास कार्यों के दौरान पेड़ों को बचाने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और तेजी से बढ़ते शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का ड्राफ्ट पेश किया। इस नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य विकास परियोजनाओं, जैसे कि मेट्रो रेल, चौड़ी सड़कों और फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान हरे-भरे पेड़ों को कटने से बचाना और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवित करना है।
इस नीति के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान '1:20' का अनुपात है। यदि किसी अनिवार्य विकास परियोजना के लिए एक पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले में संबंधित एजेंसी या विभाग को 20 नए पौधे लगाने होंगे। यह नियम वर्तमान के '1:10' के नियम से कहीं अधिक सख्त है, जो भविष्य में हरित आवरण को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है। इसके साथ ही, नीति में यह अनिवार्य कर दिया गया है कि परियोजना क्षेत्र में आने वाले कम से कम 80% पेड़ों को काटा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें 'ट्रांसलोकेट' यानी जड़ सहित उखाड़कर दूसरी जगह सुरक्षित रूप से लगाया जाएगा।
पॉलिसी के अनुसार, पेड़ों को शिफ्ट करने की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसियों की होगी। केवल उन्हीं पेड़ों को काटने की अनुमति दी जाएगी जिनका ट्रांसलोकेशन तकनीकी रूप से संभव नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल पेड़ लगा देना ही काफी नहीं होगा; उन पेड़ों के जीवित रहने की दर (Survival Rate) की निगरानी की जाएगी। एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्रांसलोकेट किए गए अधिकांश पेड़ नए स्थान पर पनपें। इसके लिए विशेषज्ञों की देखरेख में आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में मेट्रो और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के कारण हजारों पुराने पेड़ों को हटाने की आवश्यकता पड़ी थी, जिसका पर्यावरण प्रेमियों ने कड़ा विरोध किया था। हाईकोर्ट में इस मामले पर चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने भी सरकार को सख्त नीति बनाने के निर्देश दिए थे।
भारत की इस तरह की पर्यावरण नीतियों पर विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की भी गहरी नजर रहती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल भारत के 'नेट जीरो' लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी। मेलबर्न और सिडनी जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में भी शहरी वानिकी (Urban Forestry) के लिए कड़े नियम हैं, और अब मध्य प्रदेश की यह नीति अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचती दिख रही है। यह नीति न केवल पर्यावरण को बचाएगी बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सस्टेनेबल मॉडल भी पेश करेगी।
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