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पहचान की राजनीति से परे: पंजाब को वित्तीय संकट से उबारने के लिए कड़े आर्थिक सुधारों की दरकार

ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 03:32 pm
पहचान की राजनीति से परे: पंजाब को वित्तीय संकट से उबारने के लिए कड़े आर्थिक सुधारों की दरकार

पंजाब का बढ़ता कर्ज और आर्थिक संकट केवल भावनात्मक मुद्दों से हल नहीं होगा। राज्य की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अब ठोस आर्थिक और संरचनात्मक सुधार अनिवार्य हो गए हैं।

पंजाब, जिसे कभी भारत का 'अन्नदाता' कहा जाता था, आज एक गंभीर वित्तीय चौराहे पर खड़ा है। राज्य का बढ़ता कर्ज और राजकोषीय घाटा केवल भावनात्मक नारों या पहचान की राजनीति से हल होने वाला नहीं है। चाहे वह बेअदबी का मामला हो या सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का विवाद, ये मुद्दे जनता की संवेदनाओं से तो जुड़े हैं, लेकिन ये राज्य के खाली खजाने को भरने में सक्षम नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब को अब अपनी राजनीति को भावनाओं से हटाकर ठोस आर्थिक नीतियों पर केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता है। पंजाब की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा संकट उसका कर्ज है। वर्तमान में राज्य पर कर्ज का बोझ उसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। राजस्व का एक बड़ा हिस्सा केवल पुराने कर्ज के ब्याज को चुकाने और सरकारी कर्मचारियों के वेतन-पेंशन में चला जाता है। इसके परिणामस्वरूप, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए निवेश की गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है। राजनीतिक दलों द्वारा लोकलुभावन वादे और मुफ्त सुविधाओं की घोषणाओं ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। कृषि के मोर्चे पर, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की बहस पंजाब के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बनी हुई है। हालांकि किसानों की मांगें जायज हो सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल एमएसपी पर निर्भरता से पंजाब के कृषि संकट का दीर्घकालिक समाधान संभव नहीं है। मिट्टी की गिरती उर्वरता और घटता भूजल स्तर यह संकेत दे रहे हैं कि पंजाब को गेहूं और धान के चक्र से बाहर निकलकर फसल विविधीकरण (crop diversification) की ओर बढ़ना होगा। इसके लिए सरकार को ऐसे प्रोत्साहन देने होंगे जो केवल राजनीति से प्रेरित न होकर आर्थिक रूप से टिकाऊ हों। ऑस्ट्रेलिया में बसे विशाल पंजाबी समुदाय के लिए पंजाब की यह आर्थिक स्थिति गहरी चिंता का विषय है। प्रवासी भारतीय (NRI) न केवल पंजाब में भारी निवेश करते हैं, बल्कि उनकी जड़ें और संपत्तियां भी वहां मौजूद हैं। पंजाब की अस्थिर अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (remittances) के उपयोग और वहां उनके द्वारा किए गए निवेश के भविष्य को प्रभावित करती है। एक समृद्ध पंजाब ही विदेश में रह रहे पंजाबियों को अपनी मातृभूमि से जुड़े रहने और निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। अंततः, पंजाब को एक 'आर्थिक ब्लूप्रिंट' की जरूरत है जो टेलीविजन बहसों के शोर और चुनावी लाभ-हानि से ऊपर हो। उद्योगों को पुनर्जीवित करना, कृषि में नवाचार लाना और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना ही वे रास्ते हैं जिनसे राज्य अपनी पुरानी गरिमा वापस पा सकता है। समय आ गया है कि राज्य के नीति-निर्धारक पहचान की राजनीति के बजाय विकास की राजनीति को प्राथमिकता दें, ताकि पंजाब की अगली पीढ़ी को एक कर्जमुक्त और समृद्ध भविष्य मिल सके।
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