राजनीति
मॉनसून सत्र से पहले टकराव: सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का कड़ा रुख, क्या हंगामे की भेंट चढ़ेगी संसद?
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 05:35 am

संसद के मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया है। टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने के विरोध में विपक्षी दलों ने बैठक का बहिष्कार कर टकराव के संकेत दिए हैं।
नई दिल्ली: भारतीय संसद के मॉनसून सत्र की औपचारिक शुरुआत से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट खुलकर सामने आ गई है। सोमवार से शुरू होने वाले इस सत्र की रूपरेखा तय करने के लिए रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक किसी समाधान के बजाय विवादों का केंद्र बन गई। विपक्षी दलों ने सांकेतिक रूप से इस बैठक का बहिष्कार कर स्पष्ट कर दिया है कि सदन के भीतर सरकार के लिए राह आसान नहीं रहने वाली है।
विवाद की मुख्य जड़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किया जाना रहा। विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकार जानबूझकर विपक्षी खेमे में फूट डालने और मुख्य नेतृत्व को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है। इस कदम को विपक्ष ने संसदीय परंपराओं का अपमान बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार अपनी मंशा स्पष्ट नहीं करती और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन नहीं करती, तब तक सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना चुनौतीपूर्ण होगा।
बैठक में मौजूद सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार सभी महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष ने रविवार के घटनाक्रम को आने वाले दिनों का 'ट्रेलर' करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के सत्र में मणिपुर हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर जमकर हंगामा होने के आसार हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी भारत की संसदीय स्थिरता और वहां होने वाले नीतिगत फैसले काफी मायने रखते हैं। भारत में होने वाला विधायी शोर-शराबा अक्सर प्रवासी भारतीयों के बीच चर्चा का विषय बनता है, क्योंकि यह देश की लोकतांत्रिक छवि और निवेश के माहौल को प्रभावित करता है। यदि मॉनसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता है, तो कई महत्वपूर्ण लंबित विधेयकों पर चर्चा रुक सकती है, जिसका सीधा असर देश की विकास दर और वैश्विक साख पर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि वह जनता से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रतिबद्ध है, बशर्ते विपक्ष सदन चलने दे। दूसरी ओर, एकजुट विपक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार को बिना जवाबदेही के सदन से बाहर नहीं जाने देंगे। रविवार की बैठक में जो तल्खी दिखी, उसने यह तय कर दिया है कि मॉनसून सत्र न केवल लंबा होगा, बल्कि हाल के वर्षों के सबसे विवादित सत्रों में से एक हो सकता है।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन: कांग्रेस की मुख्य मांगें और सरकार की पहल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया, जहां केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात कर गतिरोध सुलझाने की कोशिश की।
22 जुल॰ 2026, 12:35 am

राजनीति
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का किया दौरा; सामाजिक कार्यों की सराहना की
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का दौरा कर वहां चल रहे सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों का जायजा लिया और संस्थान के प्रयासों की सराहना की।
21 जुल॰ 2026, 11:35 pm
राजनीति
हांसी के सेक्टर-5 में गहराया जल संकट: प्रशासन की वादाखिलाफी के विरोध में निवासियों का अनिश्चितकालीन धरना
हरियाणा के हांसी में सेक्टर-5 के निवासियों ने सालों से जारी पेयजल किल्लत और प्रशासन द्वारा बार-बार किए गए झूठे वादों के खिलाफ अब अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
21 जुल॰ 2026, 10:35 pm

