राजनीति
मोदी के 12 साल: भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 11:31 am

10 जून, 2026 को पीएम मोदी ने नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए निर्वाचित कार्यकाल के मामले में इतिहास रच दिया। उनके 12 साल सुशासन और डिजिटल क्रांति के प्रतीक रहे हैं।
10 जून, 2026 को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पद पर 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं, जिसके साथ ही वह भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निरंतर सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के निर्वाचित कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि भारत के विविध और चुनावी रूप से जागरूक समाज में एक नेतृत्व की निरंतर स्वीकार्यता का प्रमाण है।
पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने शासन की परिभाषा को 'परोपकार' से बदलकर 'वितरण' (delivery) पर केंद्रित किया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह गौरव का क्षण है, क्योंकि इस दौरान भारत की वैश्विक छवि में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। जहां पहले की सरकारें गरीबी उन्मूलन और समावेश की बात करती थीं, वहीं मोदी सरकार ने इसे बैंक खाते, शौचालय, गैस कनेक्शन और पक्के घरों जैसे मापने योग्य परिणामों में बदल दिया है। जन धन योजना के तहत 58 करोड़ से अधिक लाभार्थी और उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10.55 करोड़ गैस कनेक्शन इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
डिजिटल इंडिया की सफलता ने भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में खड़ा कर दिया है। साल 2025 में यूपीआई (UPI) के माध्यम से लगभग 22,000 करोड़ लेनदेन हुए, जो यह दर्शाता है कि एक रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, डिजिटल अर्थव्यवस्था अब भारत का स्वभाव बन चुकी है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई है। 2014 में जो राष्ट्रीय राजमार्ग 91,287 किलोमीटर थे, वे अब बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर में चेनाब रेल ब्रिज और अंजी ब्रिज जैसे प्रोजेक्ट्स ने न केवल भौगोलिक दूरियां कम की हैं, बल्कि भावनात्मक एकीकरण को भी मजबूत किया है।
वैश्विक मंच पर भारत की धमक अब पहले से कहीं अधिक है। 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' शिखर सम्मेलन और सफल जी-20 अध्यक्षता ने भारत को एक 'संयोजक शक्ति' (convening power) के रूप में स्थापित किया है। विश्व बैंक के अप्रैल 2026 के आकलन के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। सिडनी से लेकर मेलबर्न तक रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने भी महसूस किया है कि आज भारत वैश्विक चर्चाओं में केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि एक निर्णायक आवाज है।
12 वर्षों की इस निरंतरता ने नीतिगत दिशा को स्थायित्व दिया है। वंदे भारत ट्रेनों से लेकर स्टार्टअप इंडिया तक, युवाओं के लिए आकांक्षाओं के नए द्वार खुले हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह कार्यकाल भारतीय राज्य और सामान्य नागरिक के बीच के संबंधों को फिर से परिभाषित करने वाला रहा है, जहां नागरिक अब सरकार को केवल एक 'निरीक्षक' के रूप में नहीं, बल्कि सशक्तिकरण के एक माध्यम के रूप में देखते हैं।
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