राजनीति
मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद: ईरान ने संघर्ष विराम के लिए रखीं शर्तें, अमेरिका के वादों पर टिकी नजर
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 01:01 pm

ईरान ने मिडिल ईस्ट में शांति समझौते के लिए अपनी शर्तें पेश की हैं। उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि 60 दिनों की बातचीत का भविष्य अमेरिका द्वारा वादे पूरे करने पर निर्भर है।
मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव के बीच शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में संघर्ष विराम और शांति बहाली के लिए तैयार है, बशर्ते उसकी मुख्य चिंताओं को समझौते के मसौदे में शामिल किया जाए। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए शांति प्रक्रिया की रूपरेखा साझा की है।
गरीबाबादी के अनुसार, ईरान ने प्रस्तावित शांति समझौते के ड्राफ्ट में अपनी सभी प्राथमिकताओं और शर्तों को शामिल कर लिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि 60 दिनों की प्रस्तावित बातचीत की शुरुआत पूरी तरह से अमेरिका के व्यवहार पर निर्भर करेगी। ईरान का रुख साफ है कि जब तक वाशिंगटन अपने पिछले वादों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक कूटनीतिक चर्चाओं का आगे बढ़ना मुश्किल होगा।
तेहरान का यह रुख एक ऐसे समय में आया है जब इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम के प्रयासों में तेजी आई है। राजनयिक सूत्रों का मानना है कि ईरान समर्थित गुटों और इजरायल के बीच तनाव कम करने के लिए यह एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन करेगा जो क्षेत्र की संप्रभुता और न्यायसंगत मांगों का सम्मान करता हो।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिडिल ईस्ट में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में मुद्रास्फीति और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में ऐसे भारतीय पेशेवर और छात्र हैं जिनके परिजन खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। संघर्ष विराम की स्थिति में इन परिवारों की सुरक्षा और यात्रा संबंधी चिंताएं कम होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच सहमति बनती है, तो यह केवल द्विपक्षीय मामला नहीं होगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा संरचना को बदल देगा। फिलहाल, वैश्विक समुदाय की नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या बाइडन प्रशासन ईरान की शर्तों को स्वीकार करते हुए बातचीत की मेज पर लौटेगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा।
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