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मध्य पूर्व में गहराता संकट: यूएई ने की तत्काल युद्धविराम और शांति की अपील

ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 09:34 am
मध्य पूर्व में गहराता संकट: यूएई ने की तत्काल युद्धविराम और शांति की अपील

संयुक्त अरब अमीरात ने मध्य पूर्व में जारी हिंसा को तत्काल रोकने का आह्वान किया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मध्य पूर्व में जारी शत्रुता और सैन्य गतिविधियों को तत्काल समाप्त करने की पुरजोर मांग की है। यूएई के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव न केवल अरब जगत बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। खाड़ी देश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे मानवीय संकट को टालने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अधिकतम संयम बरतें। यूएई का यह रुख ऐसे समय में आया है जब इजरायल और उसके पड़ोसियों के बीच संघर्ष एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अबू धाबी ने स्पष्ट किया है कि केवल कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल सकता है। यूएई ने नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत रसद और सहायता की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया में लगभग दस लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा व्यापार और पारिवारिक संबंधों के कारण मध्य पूर्व, विशेष रूप से यूएई से जुड़ा हुआ है। दुबई और अबू धाबी जैसे शहर न केवल भारत बल्कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए प्रमुख 'ट्रांजिट हब' (पारगमन केंद्र) हैं। यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर विमानन सेवाओं और हवाई टिकटों की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे हजारों प्रवासी भारतीय प्रभावित होंगे। इसके अलावा, मध्य पूर्व में अस्थिरता का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया एक बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर यहां के भारतीय परिवारों के बजट और रसद लागत को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई की शांति की अपील न केवल भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। यूएई ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया है कि एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य और दो-राज्य समाधान (Two-state solution) ही इस क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति का एकमात्र रास्ता है। भारत ने भी ऐतिहासिक रूप से मध्य पूर्व में शांति और संवाद का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि कई परिवारों के सदस्य आज भी खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। अंत में, संयुक्त अरब अमीरात ने जोर दिया है कि युद्ध और हिंसा कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकते। खाड़ी देशों के इस सक्रिय रुख को वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है, और अब दुनिया की नजरें प्रमुख शक्तियों के अगले कदमों पर टिकी हैं ताकि इस संघर्ष को और अधिक फैलने से रोका जा सके।
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