राजनीति
मायावती का चुनावी बिगुल: हिमाचल और जम्मू-कश्मीर यूनिट को संगठन मजबूत करने के सख्त निर्देश
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 05:00 am

बसपा प्रमुख मायावती ने हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की राज्य इकाइयों के साथ बैठक कर संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आगामी चुनावों और संगठन की मजबूती को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान मायावती ने हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की राज्य इकाइयों के वरिष्ठ पदाधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इन राज्यों में पार्टी की पकड़ को फिर से मजबूत करना और 'सर्वसमाज' (समाज के सभी वर्गों) को पार्टी से जोड़ना था।
बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि दोनों राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, और बसपा को अपनी वैचारिक जड़ों की ओर लौटते हुए कैडर आधारित नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे केवल चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि साल भर जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करें। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां पारंपरिक रूप से दो दलीय व्यवस्था रही है, वहां मायावती तीसरे विकल्प के रूप में बसपा को खड़ा करना चाहती हैं।
जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में मायावती ने विशेष रूप से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद राज्य में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है, और मायावती मानती हैं कि उनकी पार्टी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर वहां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने राज्य प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे युवाओं और महिलाओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपें ताकि पार्टी का चेहरा आधुनिक और समावेशी बन सके।
मायावती ने स्पष्ट किया कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला और ब्लॉक स्तर पर कमेटियों के पुनर्गठन का आदेश दिया है। इस रणनीति के तहत बसपा अब केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित न रहकर उच्च जातियों और मध्यम वर्ग तक भी पहुंचने का प्रयास करेगी। पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग की यह पुरानी नीति अब हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में लागू की जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो उत्तर भारतीय राज्यों से ताल्लुक रखते हैं, भारत की क्षेत्रीय राजनीति में हो रहे इन बदलावों पर करीब से नजर रखते हैं। मायावती का यह कदम यह संकेत देता है कि बसपा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए अब उत्तर प्रदेश से बाहर भी अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। आगामी महीनों में इन राज्यों में होने वाली रैलियां और जनसंपर्क अभियान पार्टी की भविष्य की दिशा तय करेंगे।
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