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पिलखुवा: लूट की झूठी कहानी गढ़ना युवक को पड़ा भारी, पुलिस को गुमराह करने के आरोप में गिरफ्तार

ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 09:10 am
पिलखुवा: लूट की झूठी कहानी गढ़ना युवक को पड़ा भारी, पुलिस को गुमराह करने के आरोप में गिरफ्तार

हापुड़ के पिलखुवा में पुलिस को लूट की फर्जी सूचना देकर गुमराह करने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। जांच में लूट की बात पूरी तरह काल्पनिक पाई गई।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस की मुस्तैदी ने एक युवक द्वारा रची गई लूट की झूठी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस को गुमराह करने और सरकारी मशीनरी का समय बर्बाद करने के आरोप में पुलिस ने संबंधित युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने दावा किया था कि उसके साथ हजारों रुपये और मोबाइल फोन की लूट हुई है, लेकिन गहन जांच में यह मामला पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत पाया गया। घटनाक्रम के अनुसार, युवक ने पिलखुवा पुलिस को सूचना दी थी कि अज्ञात बदमाशों ने उसे घेर लिया और धमकाकर उससे 45,000 रुपये नकद और उसका कीमती मोबाइल फोन लूट लिया। लूट की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कई टीमें जांच के लिए गठित की गईं। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। हालांकि, जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, युवक के बयानों में विरोधाभास नजर आने लगा। पुलिस द्वारा की गई तकनीकी जांच और स्थानीय पूछताछ में लूट की किसी भी घटना की पुष्टि नहीं हुई। जब पुलिस ने युवक से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने स्वीकार किया कि उसने निजी कारणों और कुछ आर्थिक उलझनों के चलते लूट की यह झूठी कहानी गढ़ी थी। पुलिस के मुताबिक, इस तरह की झूठी सूचनाओं से न केवल पुलिस का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि समाज में असुरक्षा का माहौल भी पैदा होता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो आपसी विवाद या निजी लाभ के लिए पुलिस को फर्जी सूचनाएं देते हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) और अब नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत पुलिस को गलत जानकारी देना एक दंडनीय अपराध है। पिलखुवा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आधुनिक सर्विलांस और जांच तकनीकों के युग में पुलिस को चकमा देना नामुमकिन है। प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण सबक है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी 'पब्लिक मिस्चीफ' (Public Mischief) या पुलिस को गलत जानकारी देना एक गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। चाहे भारत हो या ऑस्ट्रेलिया, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गुमराह करना व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के लिए विनाशकारी परिणाम ला सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदार बनें और केवल सच्ची घटनाओं की ही रिपोर्ट दर्ज कराएं ताकि पुलिस वास्तविक पीड़ितों की सहायता पर अपना ध्यान केंद्रित कर सके।
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