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महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी के प्रति जताई अटूट निष्ठा; तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद की खबरों को नकारा

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 03:00 pm
महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी के प्रति जताई अटूट निष्ठा; तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद की खबरों को नकारा

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी को पार्टी की असली धुरी बताते हुए विद्रोह की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे कथित घमासान के बीच, सांसद महुआ मोइत्रा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की है। मोइत्रा ने स्पष्ट किया है कि ममता बनर्जी ही 'असली तृणमूल' हैं और उनके नेतृत्व को लेकर पार्टी में कोई संशय नहीं है। यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि पार्टी के भीतर एक 'विद्रोही' गुट पनप रहा है। हालिया घटनाक्रम में कुछ अपुष्ट खबरों ने संकेत दिया था कि शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान और सयोनी घोष जैसे प्रमुख चेहरों सहित लगभग 19 सांसद किसी असंतोष पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि, महुआ मोइत्रा ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी भी ऐसे पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर कोई चुनौती मौजूद है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस इस समय सांगठनिक बदलाव और पुरानी पीढ़ी बनाम नई पीढ़ी के वैचारिक संघर्ष से गुजर रही है। हालांकि, मोइत्रा का यह बचाव पार्टी में एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि पार्टी का हर कार्यकर्ता और नेता ममता बनर्जी के संघर्षों की उपज है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल भाजपा बंगाल में टीएमसी की आंतरिक कलह को भुनाने की कोशिश कर रही है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले प्रवासी, भारत की राजनीति में इस उथल-पुथल को बारीकी से देख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय बंगाली डायस्पोरा के लिए तृणमूल कांग्रेस की स्थिरता राज्य के विकास और भविष्य के निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक संबंधों के बीच, भारतीय राज्यों की राजनीतिक स्थिरता प्रवासी भारतीयों के लिए चर्चा का एक प्रमुख विषय बनी रहती है। फिलहाल, काकोली घोष दस्तार जैसे नेताओं की कुछ रहस्यमयी टिप्पणियों ने चर्चा को और हवा दी थी, लेकिन महुआ मोइत्रा के इस कड़े रुख ने फिलहाल 'विद्रोह' की अटकलों पर विराम लगाने का काम किया है। पार्टी नेतृत्व अब आगामी चुनावी चुनौतियों और सांगठनिक मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि कैडर के बीच किसी भी प्रकार के भ्रम को दूर किया जा सके।
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