ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग
महाराष्ट्र में 'एनालॉग पनीर' पर पूर्ण प्रतिबंध: मिलावटखोरी पर नकेल, दोषियों को होगी जेल और भारी जुर्माना
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 08:37 pm

महाराष्ट्र सरकार ने मिलावटी पनीर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 'एनालॉग पनीर' के निर्माण और बिक्री पर बैन लगा दिया है। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'एनालॉग पनीर' यानी गैर-डेयरी पनीर के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंताओं को देखते हुए लिया गया यह निर्णय मिलावटखोरी के खिलाफ सरकार की जीरो-टोलरेंस नीति को दर्शाता है। इस प्रतिबंध के साथ ही महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद ऐसा कड़ा फैसला लेने वाला भारत का दूसरा राज्य बन गया है।
एनालॉग पनीर जिसे अक्सर 'नकली पनीर' के रूप में जाना जाता है, दूध के फैट और प्रोटीन के बजाय वनस्पति वसा (vegetable fat), स्टार्च और रसायनों का उपयोग करके बनाया जाता है। यह दिखने में असली पनीर जैसा ही होता है, लेकिन इसके पोषक तत्व और गुणवत्ता असली डेयरी उत्पाद की तुलना में बहुत कम होती है। कई बार लागत कम करने के चक्कर में होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी ग्राहकों को बताए बिना इसी सस्ते विकल्प का उपयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
महाराष्ट्र सरकार के आदेश के अनुसार, नए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अपराध की गंभीरता और मिलावट के स्तर के आधार पर, दोषियों को 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजारों, थोक विक्रेताओं और खाद्य प्रतिष्ठानों पर नियमित छापेमारी करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं भी एनालॉग पनीर का उपयोग नहीं हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल हृदय संबंधी रोगों और मोटापे के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से त्योहारों के सीजन में इसकी मांग और आपूर्ति काफी बढ़ जाती है। सरकार के इस कदम से न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि उन डेयरी किसानों और ईमानदार उत्पादकों को भी लाभ मिलेगा जो शुद्ध दूध से पनीर तैयार करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में 'फूड स्टैंडर्ड्स ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड' (FSANZ) के कड़े नियम लागू हैं, लेकिन प्रवासी समुदाय अक्सर भारत से आयातित उत्पादों या स्थानीय दुकानों में मिलने वाले भारतीय शैली के पनीर पर निर्भर रहता है। भारत में खाद्य सुरक्षा के इन कड़े मानकों से वैश्विक स्तर पर भारतीय खाद्य उत्पादों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश कर सकता है ताकि देशभर में शुद्ध और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित किया जा सके।
संबंधित ख़बरें

ब्रेकिंगब्रेकिंग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का छिपा हुआ चेहरा: तकनीक में बढ़ता लैंगिक भेदभाव और सामाजिक चुनौतियां
एआई केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रहों का दर्पण है, जो विशेष रूप से लैंगिक असमानता को बढ़ावा दे रहा है।
5 अग॰ 2026, 09:37 pm

ब्रेकिंगब्रेकिंग
Resolve360 को अपनी अत्याधुनिक पुनर्वास पद्धति के लिए मिला भारतीय पेटेंट; स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता भारत का दबदबा
स्वास्थ्य तकनीक कंपनी Resolve360 ने न्यूरोमस्कुलर और मस्कुलोस्केलेटल विकारों के लिए अपनी विशेष पुनर्वास पद्धति हेतु भारतीय पेटेंट हासिल कर लिया है।
5 अग॰ 2026, 07:37 pm

ब्रेकिंगब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ले सकते हैं बड़े फैसले
रायपुर के महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है, जिसमें राज्य के विकास से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।
5 अग॰ 2026, 06:37 pm
