राजनीति
महराजगंज: बिजली की बढ़ती दरों और अघोषित कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरी 'आप', प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 10:00 am

आम आदमी पार्टी ने महराजगंज में बिजली संकट और महंगी दरों के खिलाफ प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में बिजली की बढ़ती कीमतों और लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती ने राजनीतिक गरमाहट बढ़ा दी है। आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भीषण गर्मी के बीच जनता न केवल बिजली की किल्लत से जूझ रही है, बल्कि भारी-भरकम बिजली बिलों के बोझ तले भी दबी जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी करते हुए राज्य सरकार और बिजली विभाग की नीतियों की आलोचना की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं ने कहा कि एक ओर सरकार निर्बाध बिजली आपूर्ति के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घंटों की कटौती की जा रही है। इसके साथ ही, स्मार्ट मीटरों में आ रही गड़बड़ियों और महंगी दरों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है।
विरोध प्रदर्शन के अंत में, 'आप' के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं: बिजली की दरों में तत्काल कमी की जाए, अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाई जाए और उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे गलत बिलों में सुधार किया जाए। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी।
इस खबर का महत्व प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए भी है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे कई भारतीय मूल के लोग अपने पैतृक गांवों में बिजली और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर करीबी नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में जहां ऊर्जा नीतियों पर अक्सर बहस होती है, वहीं भारत में बिजली का मुद्दा एक बड़े चुनावी और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बना रहता है। बिजली बिलों में पारदर्शिता और सस्ती ऊर्जा की मांग प्रवासी भारतीयों के बीच भी चर्चा का विषय रहती है क्योंकि इसका सीधा असर उनके परिवारों और वहां निवेश की गई संपत्तियों पर पड़ता है।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि दिल्ली और पंजाब में 'आप' की सरकारें मुफ्त और सस्ती बिजली दे रही हैं, तो उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं को इतनी अधिक कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि खेती-किसानी और छोटे उद्योगों के लिए बिजली की कमी एक गंभीर संकट बन गई है। फिलहाल, प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता को राहत कब मिलेगी, यह देखना अभी बाकी है।
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