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एम वी राजेश बने आईएचआरडी के नए निदेशक, विवादों में रहे अरुण कुमार को सरकार ने हटाया

ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 05:31 am
एम वी राजेश बने आईएचआरडी के नए निदेशक, विवादों में रहे अरुण कुमार को सरकार ने हटाया

केरल सरकार ने एम वी राजेश को आईएचआरडी का नया निदेशक नियुक्त किया है, उन्होंने विवादित वी ए अरुण कुमार की जगह ली है जिनकी योग्यता पर एआईसीटीई ने सवाल उठाए थे।

केरल सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए एम वी राजेश को इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट (IHRD) का नया निदेशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उस समय हुई है जब संस्थान के पूर्व निदेशक वी ए अरुण कुमार की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। सरकार का यह कदम उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों में पारदर्शिता और योग्यता मानदंडों को बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व निदेशक वी ए अरुण कुमार की नियुक्ति शुरुआत से ही कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं में घिरी रही थी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अरुण कुमार इस पद के लिए निर्धारित योग्यता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। उनकी नियुक्ति को केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जहां यह दलील दी गई थी कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई है। इस विवाद ने राज्य के शैक्षणिक हलकों में काफी हलचल पैदा की थी और सरकार की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए थे। नए निदेशक एम वी राजेश की नियुक्ति को संस्थान की छवि सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। राजेश के पास शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्र का व्यापक अनुभव है और उनकी नियुक्ति एआईसीटीई के कड़े मानकों के अनुरूप की गई है। आईएचआरडी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए, जो इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी केंद्रों का प्रबंधन करता है, एक योग्य और निर्विवाद नेतृत्व का होना अत्यंत आवश्यक है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर केरल मूल के प्रवासियों के लिए, यह खबर महत्वपूर्ण है। कई प्रवासी भारतीय अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए केरल के संस्थानों पर भरोसा करते हैं और आईएचआरडी द्वारा संचालित कॉलेजों की प्रतिष्ठा उनके लिए मायने रखती है। शासन व्यवस्था में इस तरह के सुधारों से विदेशों में रहने वाले भारतीय पेशेवरों के बीच राज्य की शिक्षा प्रणाली के प्रति विश्वास बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से आईएचआरडी के कामकाज में अधिक स्पष्टता आएगी। पिछले कुछ वर्षों में, राजनीतिक नियुक्तियों के आरोपों के कारण संस्थान की स्वायत्तता प्रभावित हुई थी। अब एम वी राजेश के नेतृत्व में उम्मीद की जा रही है कि संस्थान अपनी अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से बाहर निकलकर छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देगा। यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि जब शैक्षणिक पदों की बात आती है, तो नियामक संस्थाओं जैसे एआईसीटीई के नियमों की अनदेखी करना सरकार के लिए महंगा साबित हो सकता है।
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