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लुधियाना: पीएसपीसीएल के जूनियर इंजीनियर के खिलाफ दोहरी एफआईआर, प्रक्रियात्मक खामियों के उठे सवाल
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 02:36 pm

लुधियाना में पीएसपीसीएल के एक जूनियर इंजीनियर के खिलाफ एक ही मामले में दो एफआईआर दर्ज होने के बाद कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
पंजाब के लुधियाना में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के एक जूनियर इंजीनियर (जेई) के खिलाफ एक ही मामले में दो बार प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल बिजली विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिसिया कार्रवाई में होने वाली प्रक्रियात्मक खामियों को भी उजागर किया है।
मामले की जड़ पीएसपीसीएल के वार्षिक मिलान (reconciliation) अभ्यास से जुड़ी है। विभाग के नियमों के अनुसार, हर साल अधिकारियों को स्टोर से जारी किए गए विभागीय सामान का पूरा हिसाब देना होता है। इसमें ट्रांसफार्मर, लो-टेंशन (एलटी) लाइनें और अन्य विद्युत उपकरण शामिल होते हैं। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्टॉक में किसी भी तरह की कमी या गबन की पहचान करना है।
आरोप है कि संबंधित जूनियर इंजीनियर पर स्टोर से निकाले गए सामान के रिकॉर्ड में विसंगति बरतने का आरोप था। हालांकि, कानूनी जानकारों और विभाग के कुछ सूत्रों का कहना है कि एक ही घटनाक्रम या कथित लापरवाही के लिए दूसरी एफआईआर दर्ज करना कानून की स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन है। भारत के कानूनी ढांचे में 'डबल जेपार्डी' (एक ही अपराध के लिए दो बार सजा) के खिलाफ प्रावधान हैं, और प्रक्रियात्मक रूप से भी एक ही मामले में दो अलग-अलग जांच शुरू करना प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है।
यह मामला विशेष रूप से उन प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए प्रासंगिक है जो पंजाब में अपनी संपत्तियों और निवेशों की देखरेख करते हैं। लुधियाना जैसे औद्योगिक केंद्र में बिजली विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर पंजाब में बुनियादी ढांचे और सरकारी तंत्र में सुधार की मांग करते रहे हैं। इस तरह की प्रशासनिक त्रुटियां शासन प्रणाली में विश्वास को कमजोर करती हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वार्षिक मिलान के दौरान जब सामान का रिकॉर्ड नहीं मिलता, तो आमतौर पर विभागीय जांच की जाती है। यदि गबन की पुष्टि होती है, तभी आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। इस मामले में, यह जांच का विषय है कि क्या जानबूझकर या किसी मानवीय भूल के कारण दोहरी शिकायत दर्ज कराई गई। फिलहाल, पीएसपीसीएल के उच्च अधिकारियों ने मामले की समीक्षा करने और उचित कानूनी सुधार करने का आश्वासन दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग इस प्रक्रियात्मक चूक को कैसे सुधारता है और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई में क्या रुख अपनाता है।
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