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कुष्ठ मुक्त भारत का लक्ष्य: स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से विशिष्ट कार्ययोजना तैयार करने को कहा

ICN24 Admin 13 जून 2026, 06:07 am
कुष्ठ मुक्त भारत का लक्ष्य: स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से विशिष्ट कार्ययोजना तैयार करने को कहा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए विशिष्ट रणनीतियां और रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

भारत सरकार ने देश से कुष्ठ रोग के पूर्ण उन्मूलन के संकल्प को दोहराते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत को 'कुष्ठ मुक्त' बनाने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर की योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि हर राज्य को अपनी चुनौतियों और रोग के प्रसार के आधार पर स्थानीय रणनीतियां बनानी होंगी। हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि कुष्ठ रोग के मामलों का शीघ्र पता लगाना और समय पर उपचार शुरू करना इस मिशन की सफलता की कुंजी है। मंत्रालय का लक्ष्य साल 2027 तक देश में कुष्ठ रोग के संचरण को पूरी तरह से समाप्त करना है, जो कि वैश्विक समय सीमा से तीन साल पहले का लक्ष्य है। इसके लिए जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है। राज्यों को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि वे उन जिलों और ब्लॉकों की पहचान करें जहां अभी भी कुष्ठ रोग के नए मामले सामने आ रहे हैं। इन क्षेत्रों में 'घर-घर दस्तक' अभियान और गहन जांच कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंत्रालय ने विशेष रूप से बच्चों में होने वाले कुष्ठ रोग के मामलों पर चिंता व्यक्त की है और स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है। उपचार के साथ-साथ, सरकार ने समाज में व्याप्त कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों और कलंक (stigma) को मिटाने पर भी जोर दिया है। राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे जागरूकता अभियान चलाएं ताकि प्रभावित लोग बिना किसी हिचकिचाहट के इलाज के लिए आगे आ सकें। बहु-दवा थेरेपी (MDT) की उपलब्धता हर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकारें अपनी कार्ययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करती हैं, तो भारत इस प्राचीन बीमारी के बोझ से मुक्त हो सकता है। पंचायत स्तर पर जागरूकता और स्थानीय निकायों की भागीदारी इस राष्ट्रीय मिशन को गति प्रदान करेगी। मंत्रालय नियमित रूप से राज्यों की प्रगति की समीक्षा करेगा ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
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