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एयरक्राफ्ट कैरियर को 'बीते दौर की बात' कहना नौसेना के साथ विश्वासघात: विशेषज्ञों ने भारत की समुद्री सुरक्षा पर जताई चिंता

ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 04:00 am
एयरक्राफ्ट कैरियर को 'बीते दौर की बात' कहना नौसेना के साथ विश्वासघात: विशेषज्ञों ने भारत की समुद्री सुरक्षा पर जताई चिंता

भारत की समुद्री सुरक्षा पर छिड़ी बहस के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि विमानवाहक पोतों को पुराना बताना देश की सैन्य शक्ति को कमजोर करने की साजिश है।

भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा और हिंद महासागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) की प्रासंगिकता पर एक नई बहस छिड़ गई है। रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व नौसैनिक अधिकारियों ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर को 'पुराना' या 'बीते दौर की तकनीक' बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का विमर्श न केवल भारतीय नौसेना के मनोबल को प्रभावित करता है, बल्कि यह देश की रणनीतिक संप्रभुता के साथ एक तरह का विश्वासघात है। भारत वर्तमान में 'आईएनएस विक्रमादित्य' और स्वदेशी 'आईएनएस विक्रांत' के साथ अपनी समुद्री ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। आलोचकों का तर्क है कि आधुनिक मिसाइल तकनीक और ड्रोन के युग में ये विशालकाय पोत असुरक्षित हैं। हालांकि, नौसेना के रणनीतिकारों का कहना है कि विमानवाहक पोत केवल एक जहाज नहीं, बल्कि समुद्र के बीचों-बीच एक चलता-फिरता एयरबेस है। यह भारत को अपनी तटरेखा से हजारों मील दूर तक शक्ति प्रदर्शन (Power Projection) की क्षमता प्रदान करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो तत्व भारत को तीसरा विमानवाहक पोत (IAC-2) हासिल करने से रोकना चाहते हैं, वे अनजाने में उन विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं जो हिंद महासागर में भारत के वर्चस्व को चुनौती देना चाहती हैं। चीन जिस तेजी से अपनी नौसेना का विस्तार कर रहा है और अपने बेड़े में तीसरे और चौथे विमानवाहक पोत जोड़ रहा है, उसे देखते हुए भारत के लिए अपनी क्षमताएं बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्वाड (QUAD) गठबंधन के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं अक्सर मालाबार जैसे युद्धाभ्यास में साथ आती हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की स्थिरता के लिए भारतीय नौसेना का सशक्त होना अनिवार्य है। यदि भारत की समुद्री शक्ति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर इस क्षेत्र के व्यापारिक मार्गों और सुरक्षा ढांचे पर पड़ेगा। अंततः, विमानवाहक पोत को 'आउटडेटेड' कहना जमीनी हकीकत से आंखें मूंदने जैसा है। आधुनिक नौसेना में पनडुब्बियों और विध्वंसक जहाजों की अपनी भूमिका है, लेकिन एक 'ब्लू वॉटर नेवी' के रूप में भारत की पहचान विमानवाहक पोतों के बिना अधूरी है। यह समय रक्षा बजट और रणनीतिक योजना में स्पष्टता लाने का है ताकि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम बना रहे।
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