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कृष्णपिंगला संकष्टी गणेश चतुर्थी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और ऑस्ट्रेलिया में पूजा का समय
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 02:31 pm

2026 में कृष्णपिंगला संकष्टी चतुर्थी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाएगी। जानें इस दिन का धार्मिक महत्व और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के लिए पूजा विधि।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को 'कृष्णपिंगला संकष्टी चतुर्थी' के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व भगवान गणेश के 'कृष्णपिंगला' स्वरूप को समर्पित होगा। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विघ्नहर्ता की पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का कृष्णपिंगला स्वरूप गहरे भूरे या काले रंग का माना जाता है। इस स्वरूप की पूजा करने से मानसिक शांति और शक्ति प्राप्त होती है। भारत में यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी इसकी गहरी जड़ें हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह दिन सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2026 के लिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कृष्णपिंगला संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। हालांकि, चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 2 जुलाई की देर रात से हो जाएगा, लेकिन उदय तिथि और चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखते हुए 3 जुलाई को ही व्रत और मुख्य पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, सिडनी और ब्रिसबेन जैसे शहरों में रहने वाले भक्तों को स्थानीय चंद्रोदय समय (Moonrise timing) के अनुसार ही अपना व्रत पूर्ण करना चाहिए, जो भारत के समय से भिन्न होता है।
इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह जल्दी स्नान कर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने व्रत का संकल्प लेते हैं। दिन भर फलाहार का पालन किया जाता है और शाम को गणेश जी की षोडशोपचार पूजा की जाती है। पूजा के दौरान भगवान को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित किए जाते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक कि रात में चंद्रमा के दर्शन न कर लिए जाएं और उन्हें अर्घ्य न दिया जाए।
ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख मंदिरों, जैसे सिडनी के श्री वक्रतुंड विनायक मंदिर और मेलबर्न के श्री शिव विष्णु मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक और भजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। प्रवासी भारतीयों के लिए यह त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से अवगत कराने का एक माध्यम भी है। इस दिन सामूहिक पूजा और प्रसाद वितरण के माध्यम से समुदाय के बीच आपसी भाईचारा और सहयोग बढ़ता है।
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