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अयातुल्ला अली खामेनेई: तीन दशकों का नेतृत्व और अमेरिका के साथ निरंतर संघर्ष का इतिहास

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 05:31 pm
अयातुल्ला अली खामेनेई: तीन दशकों का नेतृत्व और अमेरिका के साथ निरंतर संघर्ष का इतिहास

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने तीन दशकों से अधिक समय तक देश का नेतृत्व करते हुए इसे एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पिछले तीन दशकों में देश की राजनीति और भू-राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है। 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद कार्यभार संभालने वाले खामेनेई न केवल ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं, बल्कि वे मध्य पूर्व में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में से एक बन गए हैं। उनके नेतृत्व में ईरान ने न केवल अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत किया है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक 'प्रतिरोध की धुरी' (Axis of Resistance) भी तैयार की है। खामेनेई का सफर 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शुरू हुआ, जहां उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में सेवा की। सर्वोच्च नेता बनने के बाद, उन्होंने देश के सुरक्षा तंत्र, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर अपनी पकड़ मजबूत की। उनके कार्यकाल के दौरान ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना किया, लेकिन खामेनेई ने अपनी 'दृढ़ता की नीति' को नहीं छोड़ा। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि ईरान को अपनी संप्रभुता के लिए पश्चिम के सामने झुकने की आवश्यकता नहीं है। भारत और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ईरान की स्थिरता और खामेनेई की नीतियां विशेष महत्व रखती हैं। ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं, विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से। मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करता है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासियों की जेब पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया, जो अमेरिका का एक करीबी सुरक्षा भागीदार है, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर कड़ी नजर रखता है, जिससे वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लिए कूटनीतिक चुनौतियां भी पैदा होती हैं। खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने लेबनान में हिजबुल्लाह, गाजा में हमास और यमन में हूतियों जैसे समूहों के माध्यम से अपनी क्षेत्रीय पैठ बढ़ाई है। हालांकि, देश के भीतर उन्हें बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा है। महंगाई और प्रतिबंधों ने आम जनता के जीवन को कठिन बना दिया है, लेकिन खामेनेई ने हमेशा बाहरी दबाव को इन समस्याओं का मुख्य कारण बताया है। आज जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है, खामेनेई का अगला कदम न केवल ईरान के भविष्य को तय करेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी बड़े बदलाव लाएगा। उनके उत्तराधिकार को लेकर भी अब चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि 85 वर्षीय नेता का स्वास्थ्य और उनकी विचारधारा आने वाले वर्षों में मध्य पूर्व की दिशा निर्धारित करेगी। ICN24 इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।
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