राजनीति
खमेनेई की अंतिम विदाई: तेहरान में भावुक हुए मोहम्मद बागेर गालिबाफ और अब्बास अराघची
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 06:31 pm

तेहरान में आयोजित सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के विदाई समारोह के दौरान ईरान के संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री अपने आंसू नहीं रोक पाए।
ईरान की राजधानी तेहरान में शुक्रवार को एक अत्यंत भावुक माहौल देखा गया, जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शीर्ष नेतृत्व की आंखों से आंसू छलक पड़े। इस राजकीय शोक समारोह के दौरान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची विशेष रूप से विचलित नजर आए। कैमरे में कैद हुई तस्वीरों और वीडियो में दोनों नेताओं को फूट-फूट कर रोते हुए देखा गया, जो ईरान के राजनीतिक गलियारों में इस क्षति की गहराई को दर्शाता है।
यह विदाई समारोह तेहरान के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित किया गया था, जहाँ हज़ारों की संख्या में लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। गालिबाफ, जो स्वयं एक अनुभवी राजनेता और पूर्व सैन्य कमांडर रहे हैं, खमेनेई के पार्थिव शरीर के पास खड़े होकर अपने आंसू पोंछते दिखे। वहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ईरान का चेहरा रहे हैं, इस विदाई के क्षणों में काफी भावुक नज़र आए। इन दोनों नेताओं का इस तरह सार्वजनिक रूप से भावनाएं व्यक्त करना ईरान की आंतरिक राजनीति और समाज में खमेनेई के प्रभाव को रेखांकित करता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में होने वाला कोई भी बड़ा नेतृत्व परिवर्तन सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार और व्यापारिक मार्गों को प्रभावित करता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग, जिनके परिवार भारत में हैं, इस स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं क्योंकि भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंध, विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह के माध्यम से, काफी गहरे हैं। ईरान में नेतृत्व का यह संक्रमण न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक कूटनीति की दिशा भी निर्धारित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गालिबाफ और अराघची जैसे कट्टर वफादारों का भावुक होना यह संकेत देता है कि आने वाले समय में ईरान अपनी घरेलू और विदेश नीतियों में खमेनेई की विरासत को ही आगे बढ़ाएगा। अराघची, जिन्होंने हाल के महीनों में पश्चिम के साथ तनावपूर्ण संबंधों को संभालने की कोशिश की है, उनके कंधों पर अब और भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। वहीं गालिबाफ को संसद के भीतर आंतरिक मतभेदों को सुलझाते हुए देश को इस शोक की घड़ी से बाहर निकालना होगा।
समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और तेहरान के आसमान में ड्रोन और लड़ाकू विमानों की गश्त जारी थी। पूरे देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ईरान का नया नेतृत्व किस दिशा में कदम बढ़ाता है, लेकिन फिलहाल पूरा देश अपने सर्वोच्च नेता के जाने के गम में डूबा हुआ है। इस आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है, और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक अब तेहरान से आने वाले अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
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