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यूएई में भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों के वीजा संकट पर केरल विपक्ष के नेता ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 03:00 am
यूएई में भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों के वीजा संकट पर केरल विपक्ष के नेता ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने विदेश मंत्रालय से यूएई में फंसे भारतीय नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं को हल करने का आग्रह किया है।

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने केंद्र सरकार से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कार्यरत सैकड़ों भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों, विशेष रूप से केरल के लोगों के सामने आ रहे वीजा संकट को हल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। यह मुद्दा दुबई स्थित ईरानी अस्पताल के बंद होने के बाद उत्पन्न हुआ है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय नर्सें और चिकित्सा कर्मचारी कार्यरत थे। सतीशन ने केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे एक पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला कि अस्पताल के अचानक बंद होने से कर्मचारियों का रेजिडेंसी स्टेटस खतरे में पड़ गया है। नियमों के अनुसार, रोजगार समाप्त होने के बाद कर्मचारियों के पास अपना वीजा स्टेटस बदलने या देश छोड़ने के लिए सीमित समय होता है। कई कर्मचारियों ने शिकायत की है कि उन्हें उनका बकाया वेतन भी नहीं मिला है और वे कानूनी पेचीदगियों के कारण नए अवसर नहीं ढूंढ पा रहे हैं। यह घटनाक्रम विदेशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और श्रम अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है, क्योंकि वहां भी बड़ी संख्या में केरल मूल के स्वास्थ्य कर्मी कार्यरत हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों के श्रम कानूनों में बड़ा अंतर है, लेकिन इस तरह की घटनाएं वैश्विक स्तर पर काम करने वाले चिकित्सा पेशेवरों की असुरक्षा को रेखांकित करती हैं। विपक्ष के नेता ने सरकार से मांग की है कि दुबई में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास को प्रभावित कर्मचारियों को कानूनी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र सरकार यूएई के अधिकारियों के साथ मिलकर इन स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 'ग्रेस पीरियड' या वीजा ट्रांसफर की सुविधा सुनिश्चित करे ताकि उन्हें जबरन भारत वापस न आना पड़े। केरल के मुख्यमंत्री और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर एकमत हैं कि प्रवासी श्रमिकों का कल्याण राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों से आने वाला प्रेषण (Remittance) केरल के सकल घरेलू उत्पाद में बड़ा योगदान देता है। यदि इन स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर सहायता नहीं मिली, तो इसका असर सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा। केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल इस संबंध में किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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