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दुबई में ईरानी अस्पताल बंद होने से केरल के स्वास्थ्यकर्मी संकट में, विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी मदद

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 04:01 am
दुबई में ईरानी अस्पताल बंद होने से केरल के स्वास्थ्यकर्मी संकट में, विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी मदद

दुबई में ईरानी अस्पताल के बंद होने से केरल के सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों का भविष्य खतरे में है। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

दुबई में स्थित ईरानी अस्पताल (Iranian Hospital) के अचानक बंद होने की खबरों के बीच, केरल के विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इस अस्पताल के बंद होने से वहां कार्यरत सैकड़ों भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों, विशेष रूप से केरल के नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ का भविष्य अधर में लटक गया है। सतीशन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इन श्रमिकों को न केवल अपनी नौकरी खोने का डर है, बल्कि वे वीजा संबंधी गंभीर प्रतिबंधों का भी सामना कर रहे हैं, जिससे उनके लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अन्यत्र रोजगार खोजना मुश्किल हो गया है। केरल के ये स्वास्थ्यकर्मी दशकों से खाड़ी देशों की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दुबई स्वास्थ्य प्राधिकरण (DHA) द्वारा नियमों में बदलाव और अस्पताल के आंतरिक प्रबंधन मुद्दों के कारण इस ऐतिहासिक चिकित्सा संस्थान के संचालन पर असर पड़ा है। सतीशन ने रेखांकित किया कि कई कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से वेतन नहीं मिला है और उनके निवास वीजा (Residence Visa) के नवीनीकरण में भी बाधाएं आ रही हैं। यदि केंद्र सरकार राजनयिक स्तर पर इस मामले को नहीं उठाती है, तो इन परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। यह स्थिति केवल दुबई तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर रह रहे मलयाली समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गई है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी केरल से आए स्वास्थ्यकर्मियों की एक बड़ी संख्या है, और इस तरह की अंतरराष्ट्रीय घटनाएं प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और उनके संरक्षण की आवश्यकता को उजागर करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में रोजगार की अस्थिरता अक्सर भारतीय प्रवासियों को ऑस्ट्रेलिया या कनाडा जैसे देशों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित करती है, जहां श्रमिक अधिकार और कानूनी संरक्षण अधिक मजबूत हैं। सतीशन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि वे विदेश मंत्रालय को दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास के माध्यम से स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने का निर्देश दें। उन्होंने मांग की कि प्रभावित कर्मचारियों को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित करने या उन्हें बिना किसी कानूनी बाधा के भारत लौटने की अनुमति देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, उन्होंने बकाया वेतन के भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए भी दबाव बनाने का आग्रह किया है। केरल सरकार और विपक्षी दलों का मानना है कि प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) पर राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों का यह संकट न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि राज्य के आर्थिक ढांचे के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि वह खाड़ी में फंसे अपने नागरिकों को इस संकट से निकालने के लिए क्या कूटनीतिक कदम उठाती है।
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