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केरल के विपक्ष के नेता ने यूएई में भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों के वीजा संकट पर पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 04:30 am

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने संयुक्त अरब अमीरात में ईरानी अस्पताल बंद होने से प्रभावित भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों की मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में फंसे सैकड़ों भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह संकट दुबई स्थित 'ईरानी अस्पताल' के बंद होने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण उत्पन्न हुआ है, जिससे वहां कार्यरत भारतीय नर्सों और चिकित्सा कर्मियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
सतीशन ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि दुबई का ईरानी अस्पताल कई दशकों से चल रहा था, लेकिन ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण इसे परिचालन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के बंद होने से न केवल इन कर्मियों की नौकरियां चली गई हैं, बल्कि उनके निवास वीजा (Residency Visas) की वैधता पर भी संकट खड़ा हो गया है। इनमें से अधिकांश कर्मचारी केरल से हैं, जिन्होंने अपनी बचत का बड़ा हिस्सा विदेश में बसने और परिवार के सहयोग में लगाया है।
भारतीय समुदाय के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि यूएई के सख्त श्रम कानूनों के तहत, बिना वैध प्रायोजक (Sponsor) के रहने पर इन कर्मियों को भारी जुर्माने या निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है। सतीशन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करें ताकि इन स्वास्थ्य कर्मियों को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया जा सके या उनके वीजा की अवधि बढ़ाई जा सके।
यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए भी एक सबक है। जिस तरह मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति प्रवासी भारतीयों की स्थिरता को प्रभावित कर रही है, वह वैश्विक श्रम बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय समुदाय अक्सर खाड़ी देशों के माध्यम से ही ऑस्ट्रेलिया पहुंचते हैं, और ऐसे किसी भी संकट का प्रभाव उनके पारिवारिक और आर्थिक नेटवर्क पर पड़ता है।
केरल सरकार और विपक्षी नेताओं ने विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया है। सतीशन ने जोर देकर कहा कि केंद्र को मानवीय आधार पर इस मामले को देखना चाहिए, क्योंकि ये स्वास्थ्य कर्मी कोविड-19 महामारी के दौरान फ्रंटलाइन वॉरियर्स रहे थे। अब जब वे खुद संकट में हैं, तो भारत सरकार का यह नैतिक दायित्व है कि वह उनकी सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए यूएई सरकार के साथ समन्वय स्थापित करे।
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