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वंदे मातरम विवाद: केंद्र के निर्देश के बावजूद केरल सरकार का पीछे हटने से इनकार

ICN24 Newsroom 16 अग॰ 2026, 01:38 pm
वंदे मातरम विवाद: केंद्र के निर्देश के बावजूद केरल सरकार का पीछे हटने से इनकार

केरल सरकार ने केंद्र के उस निर्देश को मानने से इनकार कर दिया है जिसमें 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने की बात कही गई थी, इसे राज्य के अधिकारों का मामला बताया गया है।

तिरुवनंतपुरम: केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों की रस्साकशी एक बार फिर तेज हो गई है। केरल सरकार ने केंद्र सरकार के उस निर्देश को लागू करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है, जिसमें आधिकारिक कार्यक्रमों या शैक्षणिक संस्थानों में 'वंदे मातरम' के गायन को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। राज्य सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, केंद्र का यह निर्देश दंडात्मक या अनिवार्य नहीं है, और राज्य को इसे अपने विवेक से लागू करने या न करने का पूर्ण अधिकार है। राज्य सरकार के इस रुख ने एक बार फिर भारतीय संघवाद (Federalism) और राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग पर बहस छेड़ दी है। केरल सरकार में बैठे उच्च पदस्थ सूत्रों ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत राज्यों को अपनी प्रशासनिक नियमावली तय करने की स्वतंत्रता है। राज्य प्रशासन का तर्क है कि जबरन किसी भी गीत या प्रार्थना को थोपना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत हो सकता है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार देश भर में 'एक राष्ट्र, एक विधान' और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति एकरूपता लाने का प्रयास कर रही है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर केरल मूल के प्रवासियों के लिए यह समाचार महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे मलयाली समुदाय अक्सर केरल की राजनीति और वहां के सामाजिक ताने-बाने पर करीब से नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों के बीच भी अक्सर भारतीय राज्यों की स्वायत्तता बनाम केंद्रीय सत्ता के मुद्दों पर चर्चा होती रहती है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे भारत की आंतरिक राजनीति में सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर अलग-अलग राज्यों के दृष्टिकोण भिन्न हो सकते हैं। विपक्षी दलों और केंद्र समर्थक संगठनों ने केरल सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। उनका तर्क है कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है और इसे किसी भी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, केरल में सत्तारूढ़ गठबंधन का मानना है कि केंद्र सरकार राज्यों के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है। राज्य के शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में पहले से ही तय राष्ट्रगान और अन्य प्रार्थनाएं होती हैं, जिनमें किसी भी नए बदलाव के लिए राज्य की सहमति आवश्यक है। यह पहली बार नहीं है जब केरल और केंद्र के बीच वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं। इससे पहले भी कई केंद्रीय योजनाओं और सांस्कृतिक नीतियों पर केरल ने अपना अलग रुख अपनाया है। फिलहाल, केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कानूनी या संवैधानिक मोड़ ले सकता है। प्रवासियों के लिए, यह घटना भारत में विविधता और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा की एक और मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
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