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कर्नाटक की सत्ता पर कांग्रेस की मजबूत पकड़: मंत्रिमंडल विस्तार और विधायी जीत से बढ़ा वर्चस्व
ICN24 Newsroom 16 अग॰ 2026, 09:37 am

कर्नाटक में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने विधायी चुनावों में जीत और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए अपनी पकड़ को और भी पुख्ता कर लिया है।
कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक और बाहरी समीकरणों को साधते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ को काफी मजबूत कर लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने न केवल मंत्रिमंडल का सफलतापूर्वक विस्तार किया है, बल्कि विधायी सदन के पीठासीन अधिकारियों के चुनावों में भी निर्णायक जीत हासिल की है। इन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी आलाकमान राज्य के प्रशासनिक और विधायी ढांचे पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर कर्नाटक मूल के प्रवासियों के लिए, यह स्थिरता काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेंगलुरु, जिसे 'भारत की सिलिकॉन वैली' कहा जाता है, ऑस्ट्रेलिया के साथ तकनीकी और निवेश समझौतों का केंद्र है। कर्नाटक में एक स्थिर सरकार का होना उन हजारों एनआरआई (NRI) परिवारों के लिए राहत की बात है जिनका निवेश और पारिवारिक संबंध इस राज्य से गहराई से जुड़े हुए हैं। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय कन्नड़ समुदायों के बीच भी राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डी.के. शिवकुमार ने जिस तरह से विधायी चुनावों का प्रबंधन किया, वह उनकी बढ़ती ताकत का परिचायक है। विधानसभा और विधान परिषद के चुनावों में कांग्रेस की जीत ने विपक्ष, विशेषकर भाजपा-जेडीएस गठबंधन के मनोबल को तगड़ा झटका दिया है। पीठासीन अधिकारियों के पदों पर अपने विश्वासपात्रों को बैठाकर सरकार ने विधायी कार्यों के निर्बाध संचालन का रास्ता साफ कर लिया है। इससे न केवल महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में आसानी होगी, बल्कि पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन को भी साधने में मदद मिलेगी।
मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान भी कांग्रेस ने क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों का विशेष ध्यान रखा है। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नए चेहरों को जगह दी गई है, जबकि अनुभवी नेताओं के पोर्टफोलियो में फेरबदल कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच का तालमेल, जो कभी गुटबाजी के कारण चर्चा में रहता था, अब और अधिक संगठित नजर आ रहा है।
सरकार का मुख्य ध्यान अब अपनी प्रमुख गारंटी योजनाओं (गारंटी स्कीमों) के क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे के विकास पर है। ऑस्ट्रेलिया-भारत आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के तहत कर्नाटक और ऑस्ट्रेलियाई व्यापार समूहों के बीच कई नए समझौतों की संभावना है। ऐसे में राज्य में राजनीतिक स्थिरता न केवल स्थानीय जनता के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वैश्विक भारतीय प्रवासियों के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।
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