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यूएई में भारतीय स्वास्थ्य कर्मियों पर संकट: केरल के मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 01:00 am

यूएई में कार्यरत भारतीय पैरामेडिक्स की वीजा समस्याओं और संभावित निर्वासन को लेकर केरल के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल मदद की गुहार लगाई है।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कार्यरत भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ के सामने आ रहे अनिश्चित भविष्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस मामले में केंद्र सरकार के तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है। यह मुद्दा विशेष रूप से उन स्वास्थ्य कर्मियों से जुड़ा है जो वर्तमान में क्षेत्रीय संघर्षों और वीजा नियमों में बदलाव के कारण निर्वासन के खतरे का सामना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री सतीशन ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि यूएई में हजारों भारतीय, जिनमें से अधिकांश केरल से हैं, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों और मध्य पूर्व में बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों के बीच, इन कर्मचारियों के वीजा नवीनीकरण में बाधाएं आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो बड़ी संख्या में भारतीयों को अपनी आजीविका खोनी पड़ सकती है और उन्हें स्वदेश लौटने पर मजबूर होना पड़ेगा।
यह संकट ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनके रोजगार की स्थिरता पर चर्चा तेज हो गई है। केरल सरकार ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे यूएई प्रशासन के साथ इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाएं ताकि एक सहानुभूतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। सतीशन ने स्पष्ट किया कि इन स्वास्थ्य कर्मियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दी थीं, ऐसे में उनके साथ मानवीय आधार पर व्यवहार किया जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। जिस तरह यूएई में भारतीय स्वास्थ्य कर्मी नीतिगत बदलावों का सामना कर रहे हैं, उसी तरह ऑस्ट्रेलिया में भी प्रवासी भारतीय समय-समय पर वीजा और आव्रजन नियमों में बदलाव को लेकर चिंतित रहते हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की स्वास्थ्य प्रणाली भारतीय नर्सों और डॉक्टरों पर बहुत अधिक निर्भर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार की अनिश्चितता सभी प्रवासियों के लिए एक साझा चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में आने वाला कोई भी संकट सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था, विशेषकर केरल की 'रेमिटेंस इकोनॉमी' को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से अनुरोध किया है कि प्रभावित कर्मचारियों को कानूनी सहायता और कूटनीतिक सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। फिलहाल, विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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