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आंध्र प्रदेश में 'रेड बुक शासन' का आरोप: पूर्व मंत्री काकानी गोवर्धन रेड्डी ने राजनीतिक प्रतिशोध का लगाया दावा
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 02:10 am

पूर्व मंत्री काकानी गोवर्धन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश सरकार पर 'रेड बुक' के जरिए विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, जिसमें उनके खिलाफ 27 मामले दर्ज किए गए हैं।
आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राज्य के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता काकानी गोवर्धन रेड्डी ने वर्तमान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में इस समय 'रेड बुक शासन' चल रहा है। रेड्डी का दावा है कि सत्ताधारी दल सुनियोजित तरीके से विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहा है।
एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने खुलासा किया कि उनके और कई अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ अब तक कुल 27 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने इन मामलों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया। रेड्डी के अनुसार, यह कार्रवाई केवल उन्हें और उनके समर्थकों को डराने और उनकी आवाज को दबाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध (political vendetta) के हथियार के रूप में किया जा रहा है, जो राज्य के भविष्य के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
'रेड बुक' शब्द का संदर्भ देते हुए काकानी ने कहा कि चुनाव से पहले और उसके बाद भी जिस तरह की सूचियां तैयार की गई थीं, अब उन्हीं के आधार पर चुन-चुन कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को कानूनी पेचीदगियों में उलझा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इन मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं और कानूनी रूप से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले तेलुगु भाषी लोग अपनी मातृभूमि की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई अप्रवासी भारतीय (NRIs) अक्सर राज्य में निवेश और विकास परियोजनाओं से जुड़े होते हैं। राजनीतिक अस्थिरता या प्रतिशोध की राजनीति की खबरें प्रवासी समुदाय के बीच चिंता का विषय बनती हैं, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य की छवि और वहां के व्यापारिक माहौल पर पड़ता है।
आंध्र प्रदेश की राजनीति के इस ताजा विवाद ने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच की गहरी खाई को उजागर कर दिया है। जहां सरकार इन कानूनी कार्यवाहियों को कानून सम्मत बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया आती है और यह कानूनी लड़ाई किस दिशा में मुड़ती है।
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