राजनीति
बिदादी टाउनशिप परियोजना के खिलाफ जेडीएस का बड़ा आंदोलन, 21 जून को पदयात्रा का ऐलान
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 02:01 am

जनता दल (सेकुलर) ने बिदादी टाउनशिप के विरोध में 21 जून को विशाल पदयात्रा की घोषणा की है, जिसमें 26 गांवों के हजारों किसान शामिल होंगे।
कर्नाटक के रामनगर जिले में प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जनता दल (सेकुलर) ने इस परियोजना के विरोध में एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। पार्टी के युवा नेता निखिल कुमारस्वामी ने घोषणा की है कि 21 जून को हजारों किसानों के साथ एक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी, जिसका उद्देश्य सरकार पर इस विवादास्पद परियोजना को रद्द करने का दबाव बनाना है।
यह पदयात्रा क्षेत्र के 26 गांवों से होकर गुजरेगी, जहां के किसान अपनी उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण को लेकर चिंतित हैं। जेडीएस का तर्क है कि यह परियोजना किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे स्थानीय समुदायों का विस्थापन होगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार को किसानों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं करना चाहिए और यदि अनिवार्य हो, तो उचित मुआवजे के साथ-साथ उनके पुनर्वास की पारदर्शी योजना होनी चाहिए।
निखिल कुमारस्वामी ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल भूमि की नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व और उनके भविष्य की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की आजीविका छीनने का प्रयास कर रही है। जेडीएस की मांग है कि टाउनशिप परियोजना को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाए।
रामनगर जिला पारंपरिक रूप से जेडीएस का गढ़ रहा है, और इस विरोध प्रदर्शन को आगामी चुनावों से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर कर्नाटक मूल के प्रवासी, इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी पैतृक भूमि का संरक्षण और किसानों का कल्याण हमेशा से एक भावनात्मक मुद्दा रहा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले कन्नडिगा समुदाय के लोग अक्सर भारत में भूमि सुधार और कृषि नीतियों से जुड़ी खबरों में गहरी रुचि दिखाते हैं।
जैसे-जैसे 21 जून की तारीख नजदीक आ रही है, स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारियों में जुटा है। जेडीएस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, उनका विरोध जारी रहेगा। यह आंदोलन न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि विकास और कृषि संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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