राजनीति
जेम्स कार्विल ने विवादास्पद उम्मीदवार ग्राहम प्लैटनर का किया समर्थन, स्टालिन से की तुलना
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 10:30 am

दिग्गज डेमोक्रेटिक रणनीतिकार जेम्स कार्विल ने मेन सीनेट उम्मीदवार ग्राहम प्लैटनर का समर्थन करते हुए इसे एक रणनीतिक आवश्यकता बताया है।
अमेरिका के दिग्गज डेमोक्रेटिक रणनीतिकार जेम्स कार्विल ने मेन (Maine) राज्य से सीनेट उम्मीदवार ग्राहम प्लैटनर के पक्ष में एक विवादास्पद लेकिन रणनीतिक बयान जारी किया है। कार्विल ने प्लैटनर का समर्थन करते हुए उनकी तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ के तानाशाह जोसेफ स्टालिन के साथ अमेरिका के गठबंधन से कर दी। कार्विल का तर्क है कि कभी-कभी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वैचारिक मतभेदों को दरकिनार करना अनिवार्य हो जाता है।
कार्विल ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में प्लैटनर की कमियों को स्वीकार किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को हराने के लिए प्लैटनर का साथ देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमेरिका ने हिटलर और नाजी जर्मनी को हराने के लिए 'दुष्ट' स्टालिन का साथ दिया था, वैसी ही स्थिति वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भी बनी हुई है। कार्विल के इस बयान ने अमेरिकी राजनीति में नैतिकता बनाम रणनीतिक जीत की बहस को फिर से गरमा दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते स्वरूप को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भी बहुसांस्कृतिक समाज के भीतर अक्सर यह चर्चा होती है कि क्या किसी उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि उसके राजनीतिक एजेंडे और पार्टी की विचारधारा से अधिक महत्वपूर्ण है। कार्विल का यह रुख 'व्यावहारिक राजनीति' (Realpolitik) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ व्यक्तिगत पसंद से ऊपर पार्टी की जीत को रखा जाता है।
प्लैटनर के अभियान के लिए यह समर्थन दोधारी तलवार साबित हो सकता है। जहाँ एक ओर कार्विल जैसे अनुभवी व्यक्ति का साथ उन्हें मुख्यधारा की मीडिया में चर्चा दिलाएगा, वहीं स्टालिन जैसी क्रूर ऐतिहासिक शख्सियत से तुलना किए जाने पर विपक्षी दल उन पर तीखा हमला कर सकते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत चरित्र को उच्च प्राथमिकता देते हैं, यह समझना दिलचस्प होगा कि पश्चिमी राजनीति में रणनीतिक जीत के लिए किन सीमाओं को लांघा जा रहा है।
फिलहाल, डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे चुनावी राजनीति की कड़वी सच्चाई मान रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि इस तरह की तुलना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गरिमा को कम करती है।
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