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फिनलैंड फोरम में एस. जयशंकर का बड़ा बयान: वैश्विक संकट के बीच लचीली सप्लाई चेन और कूटनीति पर दिया जोर

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 05:30 am
फिनलैंड फोरम में एस. जयशंकर का बड़ा बयान: वैश्विक संकट के बीच लचीली सप्लाई चेन और कूटनीति पर दिया जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिनलैंड फोरम में वैश्विक संघर्षों के बीच स्थिर आपूर्ति श्रृंखला और कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही भारत के ऊर्जा हितों को सर्वोपरि बताया।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में फिनलैंड फोरम में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। दुनिया भर में जारी विभिन्न संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में लचीली और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) सुनिश्चित करना किसी भी राष्ट्र की स्थिरता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में केवल कूटनीति और संवाद ही स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। ऊर्जा सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने भारत के रुख को एक बार फिर मजबूती से दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा संबंधी निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों से प्रेरित हैं। अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा खरीद के लिए 'किफायती दाम' और 'उपलब्धता' को प्राथमिकता देता है। जयशंकर के अनुसार, एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत का प्राथमिक उत्तरदायित्व अपने नागरिकों को सस्ती और निरंतर ऊर्जा प्रदान करना है। विदेश मंत्री का यह बयान ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हाल के वर्षों में 'क्रिटिकल मिनरल्स' और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर रणनीतिक साझेदारी बढ़ी है। जयशंकर द्वारा सप्लाई चेन की मजबूती पर दिया गया जोर यह संकेत देता है कि भारत अब केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय सुरक्षित और विविध व्यापारिक मार्गों की तलाश में है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया जैसे विश्वसनीय साझेदार अहम भूमिका निभा सकते हैं। मंच को संबोधित करते हुए जयशंकर ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की चिंताओं को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध और प्रतिबंधों का सबसे बुरा प्रभाव उन देशों पर पड़ता है जो इन संघर्षों का हिस्सा नहीं हैं। खाद्य सुरक्षा, उर्वरक और ईंधन की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में भारत का मानना है कि दुनिया को 'डी-रिस्किंग' (जोखिम कम करने) की दिशा में बढ़ना चाहिए ताकि भविष्य के किसी भी झटके को झेला जा सके। निष्कर्ष के तौर पर, जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे जटिल समस्याओं के समाधान के लिए पुराने ढर्रे को छोड़कर नई और लचीली व्यवस्थाएं विकसित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा और वैश्विक शांति के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
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