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जगन्नाथ रथयात्रा: पुरी में 'हेरा पंचमी' की अनूठी परंपरा, गुंडिचा मंदिर में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 03:35 am

पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के पांचवें दिन हेरा पंचमी की रस्म निभाई गई, जहाँ माता लक्ष्मी ने क्रोध में आकर प्रभु जगन्नाथ के रथ का पहिया तोड़ा।
ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा उत्सव अपने पूरे उल्लास के साथ जारी है। यात्रा के पांचवें दिन, जिसे 'हेरा पंचमी' के नाम से जाना जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोचक परंपरा निभाई गई। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ की अर्धांगिनी माता महालक्ष्मी, अपने पति के मंदिर से बाहर जाने और उन्हें साथ न ले जाने के कारण अपना 'मानवीय' रोष व्यक्त करने गुंडिचा मंदिर पहुँचीं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नौ दिनों की यात्रा पर गुंडिचा मंदिर (अपनी मौसी के घर) आते हैं, लेकिन वे देवी लक्ष्मी को मंदिर में ही छोड़ देते हैं। पांच दिनों के इंतजार के बाद, देवी लक्ष्मी का धैर्य जवाब दे जाता है और वे प्रभु की खोज में निकलती हैं। 'हेरा' शब्द का अर्थ ओड़िया भाषा में 'देखना' या 'खोजना' होता है। माता लक्ष्मी एक भव्य पालकी में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करती हैं, जिसे देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़े।
परंपरा के अनुसार, जब देवी लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर पहुँचती हैं, तो उन्हें वहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से रोक दिया जाता है। इससे क्रोधित होकर वे भगवान के मुख्य रथ 'नंदीघोष' के एक हिस्से (एक लकड़ी का टुकड़ा) को प्रतीकात्मक रूप से तोड़ देती हैं। यह रस्म भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रही, क्योंकि यह देवताओं के मानवीय स्वभाव और उनके बीच के अटूट प्रेम और मान-मनौव्वल को दर्शाती है। रथ का हिस्सा तोड़ने के बाद, देवी लक्ष्मी गुप्त मार्ग से मुख्य मंदिर वापस लौट जाती हैं।
इस बीच, गुंडिचा मंदिर में 'आड़पा दर्शन' के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। माना जाता है कि गुंडिचा मंदिर के 'आड़पा मंडप' पर भगवान के दर्शन करना अत्यंत फलदायी होता है। प्रशासन ने बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर ओड़िया प्रवासियों के लिए भी यह समय अत्यंत भावनात्मक है। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय न केवल डिजिटल माध्यमों से पुरी की इन रस्मों से जुड़े हुए हैं, बल्कि वहां के स्थानीय मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन कर रहे हैं।
आईसीएन24 (ICN24) से बात करते हुए सिडनी के एक ओड़िया सांस्कृतिक संघ के सदस्य ने बताया कि प्रवासी समुदाय के लिए पुरी की ये परंपराएं उनकी जड़ों से जुड़ने का जरिया हैं। हेरा पंचमी के साथ ही अब भगवान की वापसी यात्रा यानी 'बहुड़ा यात्रा' की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। पुरी की सड़कों पर जय जगन्नाथ के उद्घोष के बीच, भक्त अपने आराध्य के दर्शन पाकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
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