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जबलपुर के IMA हाउस में बना भव्य सीढ़ीदार झरना; अब यहीं होगा पर्यावरण-अनुकूल गणेश विसर्जन
ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 09:37 pm

जबलपुर के ऐतिहासिक आईएमए हाउस में एक आधुनिक सीढ़ीदार झरने का निर्माण किया गया है, जो अब गणेश विसर्जन के लिए एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
जबलपुर के चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र का केंद्र माने जाने वाले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हाउस ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठा और सराहनीय कदम उठाया है। शहर के प्रसिद्ध आईएमए हाउस परिसर में एक आधुनिक और कलात्मक सीढ़ीदार झरने का निर्माण किया गया है। इस भव्य झरने का उपयोग अब प्रमुख रूप से गणेश विसर्जन के लिए किया जाएगा, जो न केवल धार्मिक परंपराओं को सहेजने का एक तरीका है, बल्कि पवित्र नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने का एक गंभीर प्रयास भी है।
आईएमए हाउस का इतिहास जबलपुर के विकास के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। इस संस्थान की नींव वर्ष 1967 में रखी गई थी और तीन वर्षों के अथक निर्माण कार्य के बाद, 1970 में इस भवन का संचालन विधिवत रूप से शुरू हुआ। पिछले पांच दशकों में यह भवन शहर के डॉक्टरों और बुद्धिजीवियों के लिए चर्चा और विमर्श का मुख्य केंद्र रहा है। समय के साथ अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए, वर्ष 2019 में इस भवन का व्यापक स्तर पर जीर्णोद्धार किया गया, जिससे इसे एक आधुनिक कॉर्पोरेट स्वरूप प्राप्त हुआ। अब इस नए झरने के निर्माण ने परिसर की सुंदरता में और अधिक वृद्धि कर दी है।
यह नवाचार विशेष रूप से उन भारतीय प्रवासियों के लिए भी एक प्रेरणा है जो ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाला भारतीय समुदाय अक्सर सार्वजनिक जलाशयों के बजाय 'ग्रीन विसर्जन' या कृत्रिम तालाबों के विकल्पों को प्राथमिकता देता है। जबलपुर आईएमए का यह मॉडल वैश्विक स्तर पर प्रवासी भारतीयों के बीच भी प्रशंसा बटोर रहा है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कैसे आधुनिक बुनियादी ढांचे का उपयोग पारंपरिक उत्सवों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए किया जा सकता है।
स्थानीय चिकित्सा विशेषज्ञों और आईएमए के पदाधिकारियों का मानना है कि नदियों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के विसर्जन से जल प्रदूषण का बड़ा खतरा पैदा होता है। इस सीढ़ीदार झरने के माध्यम से विसर्जन करने से पानी को रिसाइकल किया जा सकेगा और मूर्तियों के अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित निपटान सुनिश्चित होगा। यह पहल समाज को एक स्पष्ट संदेश देती है कि आस्था और पर्यावरण की रक्षा एक साथ संभव है।
जबलपुर का आईएमए हाउस अब न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह नागरिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक नवाचार का भी एक जीवंत उदाहरण बन गया है। आने वाले गणेशोत्सव के दौरान, यह स्थान शहर के लिए एक आदर्श विसर्जन स्थल के रूप में अपनी सेवा देने के लिए तैयार है।
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