राजनीति
ट्रंप के संकेत के बाद इजरायल की बड़ी तैयारी? ईरान पर अब तक के सबसे घातक हमले का खतरा बढ़ा
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 03:31 pm

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत की संभावना को खारिज करने के बाद इजरायल द्वारा बड़े सैन्य एक्शन की खबरें तेज हो गई हैं, जिससे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है।
वाशिंगटन और यरूशलेम से आ रही हालिया रिपोर्टों ने मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आहट तेज कर दी है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि इजरायल, ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत का समय अब समाप्त हो चुका है और वह तेहरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उनके इस बयान को इजरायल के लिए एक 'ग्रीन सिग्नल' के रूप में देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली रक्षा बल (IDF) ईरान के परमाणु ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर सटीक हमलों की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि पिछले कुछ समय से चल रहे युद्धविराम के प्रयासों का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला है, इसलिए अब रणनीति बदलने की जरूरत है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के प्रति 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की नीति को दोबारा लागू किया जाएगा, जिसने उनके पिछले कार्यकाल के दौरान ईरान की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया था।
इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय पर भी पड़ना तय है। ऑस्ट्रेलिया के लिए मध्य पूर्व एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है और वहां अस्थिरता होने से वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि कई परिवारों के सदस्य खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर ईंधन की कीमतों का सीधा असर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल हमला करता है, तो ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया होगी, जिससे लेबनान और यमन जैसे देश भी इस संघर्ष की चपेट में आ सकते हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही कहा है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। अब ट्रंप के समर्थन के बाद उनके इरादों को और मजबूती मिली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि वे इस क्षेत्र में शांति और नेविगेशन की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं।
फिलहाल, कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या ट्रंप के सत्ता संभालने से पहले ही कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई होगी या यह केवल दबाव बनाने की एक रणनीति है। हालांकि, युद्ध के बादलों ने एक बार फिर दुनिया को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। आने वाले कुछ सप्ताह इस बात का फैसला करेंगे कि मध्य पूर्व का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
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