राजनीति
इजरायल-ईरान संघर्ष तेज: ऊर्जा ठिकानों पर हमला, जवाबी कार्रवाई में सैन्य एयरबेस बने निशाना
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 07:30 pm

इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल द्वारा ऊर्जा ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में एयरबेस को निशाना बनाया है।
मध्य पूर्व में स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है क्योंकि इजरायल और ईरान ने अप्रैल के बाद पहली बार एक-दूसरे पर सीधे हमले किए हैं। इजरायली सेना द्वारा लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर किए गए हमलों के बाद, संघर्ष ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ताजा घटनाक्रम में इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिसके जवाब में तेहरान ने इजरायली वायु सेना के ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार कर दी है।
यह सैन्य वृद्धि अप्रैल में हुए उस नाजुक संघर्ष विराम के टूटने का संकेत देती है, जिसने कुछ महीनों तक दोनों देशों के बीच सीधे टकराव को रोक कर रखा था। राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऊर्जा ठिकानों पर हमला करना संघर्ष को एक ऐसे स्तर पर ले जाता है जहां से आर्थिक और रणनीतिक परिणाम वैश्विक हो सकते हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसके हमले पूरी तरह से सैन्य ठिकानों तक सीमित थे, जबकि इजरायल ने चेतावनी दी है कि किसी भी नागरिक या महत्वपूर्ण संसाधन को नुकसान पहुंचाने का अंजाम भारी होगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर गहरी चिंता का विषय है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों और विमानन मार्गों पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए हवाई किराए बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, पश्चिमी एशिया में लाखों भारतीय नागरिक कार्यरत हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर ऑस्ट्रेलिया में मौजूद उनके रिश्तेदार और मित्र आशंकित हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी अपने नागरिकों को क्षेत्र की यात्रा के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'आंख के बदले आंख' की रणनीति पूरे क्षेत्र को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर धकेल सकती है। जहां एक ओर इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख वैश्विक शक्तियां, दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं ताकि मानवीय संकट को टाला जा सके।
आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे। यदि ऊर्जा और रसद ठिकानों पर हमले जारी रहते हैं, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक मानचित्र पर पड़ेगा, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी अस्थिर कर सकता है। ICN24 इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है और भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय को हर बड़े अपडेट से अवगत कराता रहेगा।
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