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क्या डायलिसिस के मरीजों के लिए शिमला मिर्च का सेवन सुरक्षित है? जानें पोटैशियम और किडनी स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 02:31 pm

डायलिसिस मरीजों के लिए आहार का चुनाव करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। जानें कि शिमला मिर्च में कितना पोटैशियम होता है और क्या यह किडनी रोगियों के लिए सुरक्षित है।
किडनी की गंभीर बीमारियों (CKD) से जूझ रहे मरीजों, विशेष रूप से जो डायलिसिस पर हैं, उनके लिए खान-पान का संतुलन बनाए रखना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। भारतीय व्यंजनों में शिमला मिर्च (Capsicum) एक लोकप्रिय सब्जी है, लेकिन डायलिसिस के दौरान पोटैशियम का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थ हृदय की धड़कन को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए मरीजों को अक्सर यह दुविधा होती है कि क्या वे शिमला मिर्च खा सकते हैं या नहीं।
मेडिकल न्यूट्रिशन के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि शिमला मिर्च को आमतौर पर मध्यम से कम पोटैशियम वाली सब्जी माना जा सकता है, बशर्ते इसकी मात्रा नियंत्रित हो। 100 ग्राम कच्ची हरी शिमला मिर्च में लगभग 170 से 180 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है। डायलिसिस के मरीजों के लिए आमतौर पर उन सब्जियों की सिफारिश की जाती है जिनमें प्रति सर्विंग पोटैशियम की मात्रा 200 मिलीग्राम से कम हो। इस लिहाज से हरी शिमला मिर्च एक सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरती है। हालांकि, लाल और पीली शिमला मिर्च में पोटैशियम की मात्रा हरी मिर्च की तुलना में थोड़ी अधिक हो सकती है, इसलिए उनके सेवन में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यहाँ की जीवनशैली और खान-पान में अक्सर प्रोसेस्ड फूड और बाहर के खाने का बोलबाला रहता है, जो किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय डायलिसिस मरीज अक्सर अपने पारंपरिक भोजन में शिमला मिर्च का उपयोग करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शिमला मिर्च को अन्य उच्च पोटैशियम वाली सब्जियों जैसे आलू या पालक के साथ मिलाने के बजाय, इसे कम पोटैशियम वाली सब्जियों के साथ पकाएं।
सब्जी को पकाने का तरीका भी काफी मायने रखता है। यदि मरीज को पोटैशियम को और भी कम करना है, तो 'लीचिंग' (Leaching) की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसमें सब्जियों को छोटे टुकड़ों में काटकर गर्म पानी में भिगोया जाता है और फिर वह पानी फेंक दिया जाता है। हालांकि शिमला मिर्च के लिए यह हमेशा अनिवार्य नहीं होता, लेकिन अतिरिक्त सुरक्षा के लिए यह एक अच्छा विकल्प है। साथ ही, सलाद के रूप में कच्ची शिमला मिर्च खाने के बजाय उसे पकाकर खाना अधिक श्रेयस्कर माना जाता है।
अंततः, हर मरीज की शारीरिक स्थिति और डायलिसिस का चक्र अलग होता है। ICN24 सभी पाठकों को सलाह देता है कि अपने आहार में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले अपने रीनल डायटिशियन (Renal Dietitian) या नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य लें। ऑस्ट्रेलिया में 'किडनी हेल्थ ऑस्ट्रेलिया' जैसे संगठन इस विषय पर विस्तृत गाइडलाइन प्रदान करते हैं, जिनका लाभ उठाकर मरीज एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते हैं।
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