ऑस्ट्रेलिया
ईरान में आर्थिक बदहाली: बुनियादी राशन की चोरी करने को मजबूर आम नागरिक, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 10:37 am

ईरान में गहराते आर्थिक संकट के बीच आम नागरिक दूध और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों की चोरी करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने मध्यम वर्ग को खत्म कर दिया है।
तेहरान और ईरान के अन्य प्रमुख शहरों से आ रही खबरें एक भयावह मानवीय और आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक कुप्रबंधन के दोहरे दबाव में दबी ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। आर्थिक विशेषज्ञों और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, देश में 'सर्वाइवल क्राइम' यानी जीवित रहने के लिए किए जाने वाले अपराधों में भारी वृद्धि देखी गई है, जहां आम नागरिक अब दुकानों से दूध, दही और ब्रेड जैसी बुनियादी खाद्य सामग्री चोरी करने को मजबूर हैं।
आंकड़ों के अनुसार, ईरान में मुद्रास्फीति (महंगाई) की दर पिछले कई महीनों से 40 से 50 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। ईरानी मुद्रा 'रियाल' की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे आयातित वस्तुओं के साथ-साथ घरेलू उत्पाद भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल गरीबी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरान के सामाजिक ढांचे के टूटने का संकेत है। जो लोग कुछ साल पहले तक मध्यम वर्ग का हिस्सा थे, वे अब अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में ईरान की भूमिका और मध्य पूर्व में उसकी स्थिति का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया, जो अपनी ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति के लिए वैश्विक स्थिरता पर निर्भर है, वहां इस तरह के क्षेत्रीय संकट का प्रभाव ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा, मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा भू-राजनीतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखता है, क्योंकि इसका असर उनके व्यापारिक निवेश और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ता है।
ईरानी समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह आर्थिक गिरावट अपराध के एक नए पैटर्न को जन्म दे रही है। पहले चोरी मुख्य रूप से कीमती वस्तुओं की होती थी, लेकिन अब सुपरमार्केट में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बुनियादी खाद्य पदार्थों को बचाने के लिए की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक प्रतिबंधों के मोर्चे पर कोई बड़ी राहत नहीं मिलती या सरकार आर्थिक नीतियों में आमूल-चूल परिवर्तन नहीं करती, तब तक आम लोगों की मुश्किलें कम होने के आसार कम हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, ईरान की वर्तमान स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है। एक समय संपन्न रहा देश आज अपनी आबादी की बुनियादी भूख मिटाने में विफल साबित हो रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के नजरिए से, यह संकट न केवल एक मानवीय त्रासदी है, बल्कि एक व्यापक भू-राजनीतिक अस्थिरता का संकेत भी है, जो आने वाले समय में वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
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