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ईरान और अमेरिका के बीच 24 घंटे में शांति समझौता संभव, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बड़ा दावा

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 01:01 am
ईरान और अमेरिका के बीच 24 घंटे में शांति समझौता संभव, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बड़ा दावा

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि ईरान और अमेरिका अगले 24 घंटों में एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिसके बाद तकनीकी वार्ता शुरू होगी।

इस्लामाबाद और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अगले 24 घंटों के भीतर एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री शरीफ के अनुसार, इस प्रारंभिक समझौते के तुरंत बाद अगले सप्ताह से तकनीकी स्तर की विस्तृत बातचीत शुरू की जाएगी ताकि समझौते की बारीकियों को अंतिम रूप दिया जा सके। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता का सामना कर रही है। हालांकि अभी तक वाशिंगटन या तेहरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का यह दावा अंतरराष्ट्रीय राजनयिक प्रयासों में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। शहबाज शरीफ ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता न केवल क्षेत्र में शांति स्थापित करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी स्थिरता प्रदान करेगा। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के लोग और प्रवासी पेशेवर वैश्विक भू-राजनीति पर कड़ी नजर रखते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजारों पर पड़ता है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच संबंध सामान्य होते हैं, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आने की उम्मीद की जा सकती है। सिडनी और मेलबर्न में व्यापारिक समुदायों ने इस खबर को सावधानी भरी उम्मीद के साथ देखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता धरातल पर उतरता है, तो यह दशकों पुराने प्रतिबंधों और कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम होगा। तकनीकी वार्ता का अगला चरण सबसे महत्वपूर्ण होगा, जहां परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में खुद को एक मध्यस्थ या सहायक के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जो क्षेत्र में उसकी घटती प्रासंगिकता को फिर से बहाल करने का एक प्रयास हो सकता है। फिलहाल, दुनिया की निगाहें अगले 24 घंटों पर टिकी हैं। क्या वाकई दशकों की दुश्मनी एक समझौते के साथ कम होगी या यह केवल एक कूटनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगी, यह समय ही बताएगा। वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका भी इस दौरान महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि नई दिल्ली के संबंध ईरान और अमेरिका दोनों के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
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