राजनीति
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका की गोपनीय वार्ता शुरू: तेहरान ने दी चेतावनी, असफलता के लिए अमेरिका और इजराइल होंगे जिम्मेदार
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 10:30 am

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण सीजफायर वार्ता शुरू हुई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वार्ता विफल होने पर जिम्मेदारी वाशिंगटन और तेल अवीव की होगी।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गई है, जहाँ ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच मध्य-पूर्व में तनाव कम करने और संभावित युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता शुरू हुई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और दुनिया भर की नजरें इस गोपनीय वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं।
तेहरान ने इस वार्ता के शुरुआती चरण में ही अपना रुख कड़ा कर लिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने में विफल रहती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल की होगी। ईरान का तर्क है कि क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण पश्चिमी हस्तक्षेप और इजराइल की सैन्य कार्रवाइयां हैं।
इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक को बेहद गोपनीय रखा गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष और ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियों पर चर्चा की जा रही है। पाकिस्तान, जिसके ईरान और अमेरिका दोनों के साथ जटिल कूटनीतिक संबंध हैं, इस मामले में एक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका देख रहा है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर संशय है कि क्या दोनों पक्ष किसी समझौते पर सहमत हो पाएंगे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े प्रवासियों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। मध्य-पूर्व में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में महंगाई और ईंधन की दरों में उछाल आ सकता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक 'अंतिम प्रयास' के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका पर इस समय दोतरफा दबाव है। एक तरफ उसे अपने सहयोगी इजराइल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो दूसरी तरफ वह ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है। आगामी अमेरिकी चुनावों के मद्देनजर, बाइडेन प्रशासन के लिए इस वार्ता की सफलता एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। वहीं, ईरान अपनी अर्थव्यवस्था पर लगे प्रतिबंधों में ढील चाहता है। फिलहाल, इस्लामाबाद की यह मेज तय करेगी कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया शांति की ओर बढ़ेगा या संघर्ष और गहराएगा।
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